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बागबेड़ा के युवा वैज्ञानिक डॉ. निखिल कुमार सिंह को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों पर पंचायत प्रतिनिधियों ने दिया सम्मान

जमशेदपुर: बागबेड़ा कॉलोनी के युवा वैज्ञानिक डॉ. निखिल कुमार सिंह को जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया। बागबेड़ा कॉलोनी स्थित कुंवर सिंह मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में डॉ. सिंह को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण क्षण में उनके माता-पिता, ओमप्रकाश सिंह को भी विशेष रूप से शॉल देकर सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि डॉ. सिंह की यह सफलता पूरे बागबेड़ा क्षेत्र और जमशेदपुर के लिए अत्यंत गौरव की बात है।IMG 20260517 WA0017

​प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फेलोशिप और शोध अनुदान से नवाजे गए डॉ. सिंह

​कार्यक्रम के दौरान पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने डॉ. सिंह की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हाल ही में उनका चयन भारत सरकार की बेहद प्रतिष्ठित “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रेरणा संकाय फेलोशिप” के लिए हुआ है। इसके अतिरिक्त, उन्हें “अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान” की ओर से “प्रधानमंत्री प्रारंभिक शोध अनुदान” भी प्राप्त हुआ है।b 1

​वर्तमान में डॉ. सिंह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में सहायक प्राध्यापक एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रेरणा संकाय फेलो के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका मुख्य शोध कार्य जीनोमिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित कृषि अनुसंधान पर केंद्रित है।

​साधारण परिवेश से स्विट्जरलैंड और जर्मनी तक का सफर

​बागबेड़ा के एक साधारण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों तक पहुंचने वाले डॉ. सिंह की शैक्षणिक यात्रा प्रेरणादायक है। उन्होंने:

  • ​पीएचडी: स्विट्जरलैंड के न्यूशातेल विश्वविद्यालय से ‘जनसंख्या जीनोमिक्स’ में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
  • ​पोस्टडॉक्टोरल शोध: जर्मनी के प्रसिद्ध म्यूनिख तकनीकी विश्वविद्यालय और कील विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल शोध कार्य पूरा किया।
  • ​मुख्य परियोजनाएं: उन्होंने गेहूं के रोगजनकों, जीनोमिक विविधता और आनुवंशिक तत्वों पर कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया है।a 2

​प्रकाशित पुस्तकें और शोध पत्र

​डॉ. सिंह अब तक लगभग 10 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने जीनोमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स विषय पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखी हैं। उनकी पुस्तक “जीनोम विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैव सूचना उपकरण” छात्रों और शोधार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और जीनोमिक्स के आधुनिक उपयोगों को बेहद सरल भाषा में समझाया गया है।

​“विदेश के आकर्षक अवसरों को छोड़, देश के ग्रामीण छात्रों के लिए लौटे भारत”

विदेश में बेहतरीन अवसर मिलने के बावजूद डॉ. सिंह ने अपनी मातृभूमि लौटकर भारत में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक का लाभ ग्रामीण और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों तक अनिवार्य रूप से पहुंचना चाहिए। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे शहरों के छात्र भी कड़ी मेहनत और निरंतर सीखने की इच्छाशक्ति से वैश्विक विज्ञान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।

 

​समारोह में गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

​इस सम्मान समारोह में मुख्य रूप से:

बागबेड़ा के ग्राम प्रधान चुनका मार्डी, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, उप मुखिया संतोष ठाकुर, मुखिया उमा मुंडा, मायावती टुडू, धनमुनी मार्डी, उपमुखिया धनंजय कुमार, कुमोद यादव, वार्ड सदस्य सीमा पांडे, कुमुद रंजन सिंह, पूजा कुमारी, समाजसेवी भोला झा, दिग्विजय सिंह, अनिल मिश्रा, पवन ओझा, राजीव चौधरी, विजय झा, मिथिलेश सिंह, अरविंद पांडेय, अनुरोध पांडेय, गुड्डू ओझा, रिंकू शर्मा सहित भारी संख्या में स्थानीय गणमान्य लोग और क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

​रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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