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एक नई सोच, एक नई धारा

आर्थिक देशभक्ति: पीएम मोदी ने पेश की मिसाल, अपने काफिले से हटाईं गाड़ियां; देश को दिया सादगी का संदेश

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए ‘आर्थिक देशभक्ति’ का मंत्र दिया है। इस मुहिम को केवल शब्दों तक सीमित न रखते हुए, प्रधानमंत्री ने स्वयं उदाहरण पेश कर नेतृत्व की एक नई मिसाल कायम की है।

​खुद से शुरुआत: छोटा हुआ पीएम का काफिला

​प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक काफिले के आकार में दो गाड़ियों की कटौती कर उसे छोटा करने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि यह फैसला सुरक्षा मानकों और SPG (विशेष सुरक्षा समूह) के कड़े प्रोटोकॉल को बरकरार रखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के समन्वय से सुरक्षा घेरे को अभेद्य रखते हुए भी संसाधनों का अनुकूलन (Optimization) संभव है।b 1

​ईंधन संरक्षण और विदेशी मुद्रा पर नजर

​पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पीएम मोदी के इस कदम का सीधा संदेश ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) और सरकारी तंत्र में मितव्ययिता (Austerity) लाना है।

​प्रधानमंत्री के इस फैसले का व्यापक असर भी दिखने लगा है:

  • ​गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिले छोटे करने की घोषणा की है।
  • ​विभिन्न मंत्रालयों ने अपने दैनिक परिचालन खर्चों में कटौती की योजना बनाई है।
  • ​सरकारी अधिकारियों को मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन और ‘कार पूलिंग’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।a 2

​7 सूत्रीय अपील और सोने से परहेज

​हाल ही में हैदराबाद में दिए अपने संबोधन में पीएम मोदी ने नागरिकों के सामने एक रोडमैप रखा था। उन्होंने वैश्विक महंगाई से लड़ने के लिए जनता से 7 महत्वपूर्ण अपीलें की थीं, जिनमें प्रमुख हैं:

    1. ​स्वर्ण त्याग: आगामी एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचना।
    2. ​ईंधन की बचत: निजी वाहनों का सीमित उपयोग और ऊर्जा संरक्षण।
    3. ​स्वदेशी को बढ़ावा: आयातित वस्तुओं के बजाय स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता।

​“जब देश संकट से जूझ रहा हो, तो शासन को भी त्याग कर जनता को प्रेरित करना चाहिए।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

 

​निष्कर्ष

​प्रधानमंत्री का ‘लीड बाई एग्जांपल’ (स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करना) दृष्टिकोण जनता में यह विश्वास पैदा कर रहा है कि उनकी अपील केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में उठाया गया एक आवश्यक कदम है। सत्ता के शीर्ष से शुरू हुई यह सादगी की लहर अब पूरे प्रशासनिक तंत्र और आम जनमानस में ‘आर्थिक देशभक्ति’ की भावना को प्रबल कर रही है।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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