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जुगसलाई: मां विंध्यवासिनी मंदिर में महानवमी पर उमड़ा आस्था का सैलाब; 101 मीठे पान के भोग के साथ हुई पूर्णाहुति

जमशेदपुर (जुगसलाई):

चैत्र नवरात्र की महानवमी के पावन अवसर पर जुगसलाई के एमई स्कूल रोड स्थित श्री श्री विंध्यवासिनी मंदिर में भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शुक्रवार को सुबह से ही मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी और मां दुर्गा के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।f10f369c30a71c1d57c9cedf92523e79129cf4a807bfa9f1f382efbc584e363c.0

​101 मीठे पान का विशेष भोग और अटूट परंपरा

​विंध्यवासिनी मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा मां को अर्पित किया जाने वाला मीठा पान है।

  • ​क्रमिक संख्या: कलश स्थापना के दिन 21 पान के भोग से शुरुआत होती है, जो बढ़ते-बढ़ते महानवमी के दिन 101 पान तक पहुंच जाती है।
  • ​शुद्धता का संकल्प: यह पान एक विशेष विक्रेता द्वारा पूरी शुद्धता के साथ तैयार किया जाता है, जो स्वयं स्नान और पूजन के पश्चात ही मां के लिए भोग तैयार करता है। महानवमी पर पूर्णाहुति के बाद इस विशेष पान प्रसाद को ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।1774674017228

​1999 से आस्था का केंद्र: जयपुर की मनोहारी प्रतिमा

​इस भव्य मंदिर की स्थापना 29 जनवरी 1999 को प्रसिद्ध समाजसेवी स्व. दीनानाथ अग्रवाल ने की थी।

  • ​प्रतिमाएं: जयपुर से लाई गई मां विंध्यवासिनी की प्रतिमा अत्यंत अलौकिक है। मुख्य मंदिर में अष्टभुजी दुर्गा, मां काली, भैरव बाबा और द्वार पर सिद्धि विनायक गणेश विराजमान हैं।
  • ​अनोखी बनावट: मंदिर के गुंबद में चार छोटे मंदिर हैं जहां भगवान शंकर, श्रीकृष्ण, गणेश जी और हनुमान जी के दर्शन होते हैं। बगल में स्थित सीतेश्वर महादेव मंदिर भी भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है।
  • ​संचालन: वर्तमान में स्व. दीनानाथ अग्रवाल के पुत्र सुनील कुमार अग्रवाल और सुशील कुमार अग्रवाल अपने पूरे परिवार के साथ मंदिर की सेवा और प्रबंधन का कार्य पूरी निष्ठा से संभाल रहे हैं।1002518072

​मंदिर से जुड़ी चमत्कारिक कथा

​बुजुर्गों और मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इसके निर्माण के दौरान एक अलौकिक घटना घटी थी। पुरुलिया के कारीगरों ने गलती से मंदिर परिसर में मांसाहार कर लिया था, जिसके बाद उन्हें रात में पायल की आवाज सुनाई दी और अदृश्य शक्तियों द्वारा चेतावनी दी गई। इस घटना के बाद से ही मंदिर की पवित्रता और शक्ति के प्रति लोगों का विश्वास और भी गहरा हो गया।

​तीसरी धारा न्यूज की विशेष रिपोर्ट

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