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एक नई सोच, एक नई धारा

बहरागोड़ा में ‘टाइम बम’ पर जिंदगी: एक और 500 पाउंड का बम बरामद; ग्रामीणों का दावा— जमीन के नीचे दबे हैं 8 और ‘मौत के सौदागर’

बहरागोड़ा/जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम का बहरागोड़ा इलाका इन दिनों किसी युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया है। सुवर्णरेखा नदी के तट पर 17 मार्च को मिले पहले अमेरिकी शक्तिशाली बम के बाद, सोमवार को भारतीय सेना के ड्रोन सर्वे ने एक और विशालकाय बम का पता लगाकर पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों के इस दावे ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है कि इस रेतीले तट के नीचे अभी कम से कम 8 और घातक बम दबे हो सकते हैं।1774272017325

​ड्रोन तकनीक से खुलासा: सेना ने संभाला मोर्चा

​सोमवार को भारतीय सेना की बम निरोधक दस्ता टीम (BDS) पनिपाड़ा-नागुडसाई मार्ग स्थित घटनास्थल पर पहुँची। आधुनिक उपकरणों और ड्रोन सर्वे के दौरान टीम को एक और बम होने के पुख्ता संकेत मिले। हालांकि इसे फिलहाल निष्क्रिय बताया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दशकों पुराना होने के बावजूद इसका बारूद अत्यंत विनाशकारी हो सकता है। अब सेना अत्याधुनिक मेटल डिटेक्टर्स के जरिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाने की तैयारी में है।

​द्वितीय विश्व युद्ध का ‘डेथ जोन’: ग्रामीणों की चेतावनी

​प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों का वह दावा है, जिसमें कहा गया है कि यहाँ जमीन के नीचे बमों का पूरा जखीरा हो सकता है। यह क्षेत्र द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सामरिक रूप से काफी सक्रिय रहा था। जानकारों के अनुसार, बरामद बम ‘AN-M64 500 lb’ मार्क का अमेरिकी हवाई बम है। यदि ग्रामीणों का 8 और बमों वाला दावा सच साबित होता है, तो यह पूरा इलाका एक बड़े विस्फोटक भंडार (UXO Hotspot) के ऊपर बसा है।

​वर्तमान स्थिति: 2 KM का दायरा ‘नो-गो जोन’

​सेना ने सुरक्षा के मद्देनजर कड़े कदम उठाए हैं:

  • ​घेराबंदी: घटनास्थल के चारों ओर 2 किलोमीटर के दायरे को ‘नो-गो जोन’ घोषित कर दिया गया है।
  • ​प्रतिबंध: पुलिस ने इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है और आम लोगों के प्रवेश पर पूर्ण रोक लगा दी गई है।
  • ​लापरवाही पर सवाल: पहला बम मिलने के बाद 6 दिनों तक इसे असुरक्षित छोड़ना चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन अब सेना की मौजूदगी में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है।

​निष्क्रिय करने की जटिल प्रक्रिया

​सेना के वरिष्ठ अधिकारी अब उच्च मुख्यालय के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। इन भीमकाय बमों को या तो किसी सुरक्षित निर्जन स्थान पर ले जाकर ‘डिफ्यूज’ किया जाएगा या वहीं नियंत्रित विस्फोट (Controlled Blast) के जरिए नष्ट किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जरा सी रगड़ या गलत दबाव दशकों पुराने केमिकल रिएक्शन को सक्रिय कर सकता है, इसलिए यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील है।

​रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बहरागोड़ा का यह पूरा बेल्ट ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) का हॉटस्पॉट हो सकता है, जिसकी विस्तृत जांच अनिवार्य है।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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