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एक नई सोच, एक नई धारा

एक्सक्लूसिव: भारत की बात मान लेता ईरान तो बच जाती 87 नौसैनिकों की जान! अमेरिकी टॉरपीडो हमले में IRIS डेना तबाही की पूरी इनसाइड स्टोरी

​नई दिल्ली/कोच्चि | तीसरी धारा न्यूज

​हिंद महासागर की लहरें इस वक्त बारूद की गंध और कूटनीतिक तनाव से उफन रही हैं। एक तरफ जहां ईरानी युद्धपोत IRIS डेना अमेरिकी टॉरपीडो का शिकार होकर समुद्र की गहराइयों में समा गया है, वहीं दूसरी ओर भारत ने दरियादिली दिखाते हुए एक अन्य ईरानी जहाज IRIS लवन को पनाह देकर सैकड़ों जिंदगियां बचा ली हैं। अब यह खुलासा हुआ है कि अगर ईरान ने भारत की शुरुआती चेतावनी मान ली होती, तो शायद ‘डेना’ और उस पर सवार 87 नौसैनिक आज जिंदा होते।

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​भारत ने दी थी पनाह की पेशकश, ईरान से हुई चूक

​सूत्रों के मुताबिक, विशाखापत्तनम में आयोजित ‘मिलन-2026’ और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) के बाद जब IRIS डेना वापस लौट रहा था, तब भारत ने युद्ध जैसे हालातों को देखते हुए उसे सुरक्षित पोर्ट पर रुकने की पेशकश की थी। भारत का स्पष्ट मानना था कि क्षेत्र में तनाव अधिक है और जहाज का अभी निकलना जोखिम भरा हो सकता है। मगर ईरान ने अपनी यात्रा जारी रखी और 4 मार्च की सुबह श्रीलंका के गाले से 20 नॉटिकल मील दूर अमेरिकी सबमरीन ने टॉरपीडो से हमला कर इसे डुबो दिया।

​IRIS लवन: कोच्चि में भारत की ‘सुरक्षित ढाल’

​जहाँ एक तरफ ‘डेना’ हादसे का शिकार हुआ, वहीं ईरान का दूसरा युद्धपोत IRIS लवन इस वक्त भारत की सुरक्षित पनाह में है।

  • ​वजह: 28 फरवरी को जहाज में तकनीकी खराबी आने के बाद ईरान ने भारत से मदद मांगी थी।
  • ​भारत का रुख: भारत सरकार ने 1 मार्च को मानवीय आधार पर डॉकिंग की मंजूरी दी।
  • ​वर्तमान स्थिति: 4 मार्च को IRIS लवन कोच्चि पोर्ट पहुंचा। जहाज पर मौजूद 183 क्रू मेंबर्स को भारतीय नौसेना की विशेष सुविधाओं में ठहराया गया है, जहां उन्हें रसद और सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है।

​रेस्क्यू ऑपरेशन और भारी नुकसान

​श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक मलबे से 32 लोगों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन 87 नौसैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। करीब 60 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना का INS इक्षक और एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट से लैस विमान लापता लोगों की तलाश में कोच्चि से रवाना हो चुके हैं।

​बढ़ता वैश्विक तनाव: 28 फरवरी की वो घटना

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुश्मनी की आग 28 फरवरी को भड़की, जब इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त एयर स्ट्राइक कर खामेनेई को निशाना बनाया। इसके बाद से ही समंदर में ईरानी जहाजों पर खतरा मंडरा रहा था। श्रीलंका ने भी एक अन्य ईरानी युद्धपोत IRIS बुशहर को अपने पोर्ट पर रुकने की अनुमति दी है।

​तीसरी धारा न्यूज की राय:

यह घटना केवल एक सैन्य हमला नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में बदलती भू-राजनीति का संकेत है। भारत ने जिस तरह से IRIS लवन के चालक दल को सुरक्षा दी है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और संकट के समय एक भरोसेमंद दोस्त है।

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