जमशेदपुर / तीसरी धारा न्यूज:
शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले शिक्षण संस्थानों में इन दिनों शिक्षा कम और व्यापार ज्यादा देखने को मिल रहा है। ताजा मामला जमशेदपुर के मानगो स्थित नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी (NSU) से सामने आया है, जहां एक छात्र को सिर्फ इसलिए कॉलेज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया क्योंकि उसने यूनिवर्सिटी परिसर से महंगी दर पर ड्रेस नहीं खरीदी थी।
यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ऐसी मनमानी की लंबी फेहरिस्त है, जिसे लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
शिक्षा या व्यापार: ड्रेस के नाम पर वसूली?
नियमानुसार शिक्षण संस्थानों का काम छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और उनके भविष्य को स्वर्णिम बनाना है। लेकिन, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान शिक्षा को व्यवसाय बनाने में जुटे हैं। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा छात्रों पर कैंपस से ही यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सामग्री खरीदने का भारी दबाव बनाया जाता है, जबकि बाजार में वही चीजें कम दामों पर उपलब्ध होती हैं।
जब कोई छात्र आर्थिक तंगी या व्यक्तिगत कारणों के चलते यूनिवर्सिटी से सीधे ड्रेस खरीदने में असमर्थता जताता है, तो उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। एक ड्रेस न खरीदने पर छात्र को क्लास से निकाल देना या निष्कासित कर देना न केवल अमानवीय है, बल्कि शिक्षा के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।
विरोध करने पर बाउंसरों का खौफ और नामांकन रद्द करने की तानाशाही
अभिभावकों और छात्रों का कहना है कि नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी में इस तरह की तानाशाही कोई नई बात नहीं है। ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जहां मनमाने फैसले के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को भविष्य बर्बाद करने की धमकी दी जाती है।
हद तो तब हो जाती है जब इस तानाशाही के खिलाफ कोई छात्र या उसके अभिभावक इस जायज मुद्दे को यूनिवर्सिटी प्रबंधन के सामने रखते हैं, तो उनकी बात सुनने के बजाय उल्टा बाउंसरों द्वारा अभिभावकों को डराया-धमकाया जाता है, और तो और उस बच्चे का नामांकन (Admission) तक रद्द कर दिया जाता है। आरोप है कि प्रबंधन अपने रसूख, बाउंसरों के खौफ और पैसों के दम पर ऐसे गंभीर मामलों को दबा देता है। सवाल यह उठता है कि क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों के भविष्य को मोहरा बनाकर अपनी जेबें भरने में लगा है? क्या छात्र यहां पढ़ाई करने आए हैं या प्रबंधन के व्यावसायिक एजेंडे का शिकार होने?
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और डीसी से होगी मुलाकात
इस गंभीर मामले पर फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और शहर के उपायुक्त (DC) का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ‘तीसरी धारा न्यूज’ की टीम कल जिला शिक्षा अधिकारी और डीसी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेगी और उन्हें इस पूरे मामले से रूबरू कराते हुए छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ और यूनिवर्सिटी की इस दबंगई पर उच्चस्तरीय जांच एवं सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करेगी।
सवाल जो खड़े होते हैं:
- क्या शिक्षा के नाम पर यह खिलवाड़ यूं ही चलता रहेगा?
- क्या चंद पैसों के मुनाफे के लिए किसी छात्र के करियर को दांव पर लगाने की अनुमति दी जा सकती है?
तीसरी धारा न्यूज की टीम इस संवेदनशील मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रशासन के रुख के साथ-साथ आगे की हर अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
शिक्षा की आड़ में व्यापार पर प्रहार — निडर पत्रकारिता, निष्पक्ष खबर!





















