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एक नई सोच, एक नई धारा

तीसरी धारा पड़ताल: पटरी से उतरी आगरा-उदयपुर वंदे भारत; 68% बुकिंग के बावजूद रेलवे ने थामे पहिए, क्या वाकई ‘यात्रियों की कमी’ है असली वजह?

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​आगरा | 15 फरवरी, 2026

​भारतीय रेलवे की प्रीमियम सेवा ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ को लेकर ताजनगरी से एक निराश करने वाली खबर आई है। रेलवे बोर्ड ने आगरा कैंट-उदयपुर सिटी-आगरा कैंट वंदे भारत ट्रेन को आज यानी 15 फरवरी से बंद करने का निर्णय लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे इस फैसले के पीछे ‘कम यात्री ट्रैफिक’ का तर्क दे रहा है, जबकि जमीनी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

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​आंकड़ों का खेल: क्या घाटे में थी ट्रेन?

​’तीसरी धारा’ की पड़ताल और बीते छह महीनों के बुकिंग आंकड़ों पर नजर डालें, तो कम आय का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता:

रूट (दिशा)सीट बुकिंग प्रतिशतकुल आय (लगभग)
आगरा से उदयपुर68.37%₹2.94 करोड़
उदयपुर से आगरा61.97%₹2.53 करोड़
कुल औसतकरीब 68%₹5.47 करोड़ (6 माह)

68 प्रतिशत की ऑक्युपेंसी किसी भी प्रीमियम ट्रेन के लिए ‘खराब’ नहीं मानी जाती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे ने किसी अन्य रणनीतिक कारण या कोच की कमी की वजह से इस लोकप्रिय ट्रेन पर ताला जड़ा है?

कोटा के छात्रों और पर्यटकों को बड़ा झटका

​ट्रेन के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित आगरा के विद्यार्थी और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग होंगे।

  • ​शिक्षा का सेतु: यह ट्रेन आगरा के हजारों छात्रों के लिए कोटा (कोचिंग हब) पहुंचने का सबसे सुगम जरिया थी। अब उन्हें फिर से बस या पुरानी पैसेंजर ट्रेनों के कठिन सफर पर निर्भर होना होगा।
  • ​पर्यटन पर असर: ताजनगरी (आगरा) और झीलों की नगरी (उदयपुर) को जोड़ने वाली इस ट्रेन से विदेशी पर्यटकों की आवाजाही आसान थी। डीआरयूसीसी मेंबर निधि अग्रवाल के अनुसार, इस फैसले से आगरा के पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान होगा।

​क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

​पूर्व डीआरयूसीसी मेंबर मुरारीलाल गोयल ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह ट्रेन बेहद कम समय में लोकप्रिय हो गई थी। अभिभावक और व्यवसायी इस सेवा के जारी रहने की उम्मीद कर रहे थे।

​”सितंबर 2024 में शुरू हुई इस ‘सौगात’ को अचानक वापस लेना समझ से परे है। जब बुकिंग 68% तक पहुंच रही थी, तो इसे कम ट्रैफिक का नाम देना तर्कसंगत नहीं लगता।”

​अगला कदम क्या?

​रेलवे प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत कारण साझा नहीं किया है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों ने रेल मंत्रालय से मांग की है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और आगरा के विकास व कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत को दोबारा शुरू किया जाए।

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