घाटशिला विधानसभा उप निर्वाचन-2025 के सुचारू संचालन हेतु जिला निर्वाचन पदाधिकारी श्री कर्ण सत्यार्थी के निर्देशन में ईवीएम डिस्पैच एवं रिसिविंग टीम को को-ऑपरेटिव कॉलेज में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मतदान दिवस पर ईवीएम की सुरक्षित पैकिंग, डिस्पैच एवं रिसिविंग की प्रक्रिया, लॉजिस्टिक व्यवस्था तथा रिटर्निंग ऑफिसर को मशीनों के हस्तांतरण से संबंधित दिशा-निर्देशों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई ।
साथ ही, मतदान दिवस पर कार्यरत कंट्रोल रूम में प्रतिनियुक्त पदाधिकारी एवं कर्मियों को भी उनकी भूमिका एवं जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान संचार व्यवस्था, रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल, शिकायत निवारण की प्रक्रिया एवं आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया हेतु विशेष निर्देश दिए गए।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को निर्देश दिया कि निर्वाचन कार्य के प्रत्येक चरण में निर्धारित समय-सारिणी एवं निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि टीम भावना, सतर्कता और समयबद्धता से ही निर्वाचन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया जा सकता है।
डिस्पैच टीम को प्रत्येक पोलिंग पार्टी को सही मतदान केंद्र के अनुसार मशीनें देना, मशीनों के सीरियल नंबर, लेबल एवं सील की जांच करना, फॉर्म / प्राप्ति रसीद पर पोलिंग पार्टी से हस्ताक्षर लेना, किसी मशीन में तकनीकी समस्या मिलने पर तुरंत तकनीकी टीम को सूचित करना तथा सभी पार्टियों को निर्धारित समय पर मशीनें प्रेषित करने का निर्देश दिया गया ।
मतदान पश्चात ईवीएम रिसिविंग टीम को सभी सील और टैग की स्थिति की जांच करना, मशीनों का विवरण रिसिविंग रजिस्टर में दर्ज करना, कंट्रोल यूनिट को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रूप से जमा कराना, वीवीपैट, बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट को अलग-अलग व्यवस्थित रखना, किसी क्षति या गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट तैयार करना एवं अपने वरीय को सूचित करना, सभी दस्तावेज़ और प्राप्ति अभिलेखों को सुरक्षित रखने की जानकारी दी गई ।
सरायकेला : जिले में अवैध अफीम की खेती रोकने के लिए वैकल्पिक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरायकेला खरसावां पुलिस द्वारा प्री कल्टीवेशन ड्राइव चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ज़िले के कई गांवों में पुलिस के पहल पर ग्राम सभाओं का आयोजन कर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। खरसावां थाना क्षेत्र के रायजामा गांव, कुचाई थाना क्षेत्र के चमपद गांव, दलभंगा ओपी अंतर्गत बिजार गांव में ग्राम सभा आयोजित की गई। इन ग्राम सभाओं मे स्थानीय जनप्रतिनिधि, मुंडा मानकी, ग्राम प्रधान, मुखिया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी ने उपस्थित ग्रामीणों को स्थानीय भाषा में अफीम के खेती से होने वाले सामाजिक और कानुनी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। पुलिस अधिकारीयों ने भी अवैध अफीम की खेती से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह गैर कानूनी है और सामाजिक बुराईयों और अपराध को भी जन्म देती है। जागरूकता अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधि, मुंडा मानकी, ग्राम प्रधान, मुखिया और ग्रामीण उपस्थित थे। उन्हें हरी सब्जियों जैसे हल्दी, अदरक, लहसुन, मक्का की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सरायकेला खरसावां पुलिस ने बताया कि यह अभियान सभी संभावित स्थानों में निरंतर जारी रहेगा, जिससे फसली वर्ष में अवैध अफीम की खेती को पुरी तरह समाप्त कि जा सके।
घाटशिला में आज झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन की जनसभा में हजारों की भीड़ उमड़ी। सभा में जमशेदपुर प्रखंड अध्यक्ष पलटन मुर्मू ने बताया कि जनता का जोश इस बात का संकेत है कि इस बार झामुमो की जीत निश्चित है।
सभा स्थल पर “हेमंत सोरेन जिंदाबाद”, “कल्पना सोरेन जिंदाबाद” और “मंगल कालिंदी जिंदाबाद” के नारे लगातार गूंजते रहे। लोगों में अबुआ सरकार के प्रति विश्वास और उम्मीद साफ झलक रही थी।
पलटन मुर्मू ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार ने गांव-गरीब, किसान और नौजवानों के लिए जो काम किया है, उसी का परिणाम है कि आज जनता पूरे उत्साह से झामुमो के साथ खड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड की मिट्टी की ताकत को कोई हरा नहीं सकता, और घाटशिला की जनता झामुमो प्रत्याशी को भारी मतों से जिताने का मन बना चुकी है। सभा स्थल पर महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की भारी उपस्थिति रही, जिससे पूरा इलाका झामुमो के नारों से गूंज उठा।
जमशेदपुर: घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का रुझान झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर है। वहां पहले भी जनता तीर धनुष छाप पर बटन दबाते हुए आ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी क़ी करारी हार होगी। सामाजिक चिंतक और अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने उक्त बातें कहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का चुनाव प्रचार काफी फीका चल रहा है उनके चुनावी जनसभा में भीड़ नदारत है जबकि मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के जनसभा में भीड़ देखी जा रही है। कभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सहयोगी रहे पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। चंपई अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए जी जान से लगे हुए हैं परंतु सफलता नहीं मिलेगी। भाजपा के बड़े से बड़े नेता भीड़ नहीं जुटा पा रहे हैं।
इस बार घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भाजपा नेताओं की पोल खुल जाएगी वे कितने पानी में है। उन्होंने कहा कि घाटशिला उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों का पूरा समर्थन है। अभी से ही रुझान समझ में आ रहा है कि झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन क़ी शानदार जीत होगी। घाटशिला के मतदाताओं द्वारा झारखंड रजत जयंती स्थापना समारोह के लिए मुख्यमंत्री को शानदार तोहफा देंगे पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय रामदास सोरेन वहां से लगातार दो बार विधायक रहे हैं। इस बार स्वर्गीय रामदास के पुत्र को टिकट देकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी का प्रत्याशी बनाया हैं जबकि चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को भाजपा ने दूसरी बार टिकट दिया है पिछली बार चुनाव हार गया था।
विधानसभा उप निर्वाचन 2025 के तहत घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में 11 नवंबर 2025 को मतदान होगा । ऐसे में मतदाताओं को मतदान करने से पहले मतदाता फोटो युक्त पहचान पत्र (ईपीक) प्रस्तुत करना है। यादि किसी कारणवश मतदाता मतदान केंद्र में ईपीक प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं तो ऐसी स्थिति में मतदाता वैकल्पिक फोटो युक्त पहचान पत्र दिखाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मतदान के लिए ईपीक के अलावा 12 अन्य वैकल्पिक दस्तावेज मान्य हैं। इसमें पासपोर्ट, ड्राइविग लाइसेंस, राज्य या केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र, बैंक या डाकघर द्वारा जारी की गई फोटोयुक्त पासबुक, पेन कार्ड, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) द्वारा जारी किए गए कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड (श्रम मंत्रालय), फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज,आधार कार्ड,सांसद/विधायक पार्षद को जारी पहचान पत्र एवं विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआइडी) शामिल है।
गोलमुरी थाना क्षेत्र के टिनप्लेट स्थित संजय सद्भावना मार्केट में बीती रात चोरी की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। अज्ञात चोरों ने मार्केट के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता अप्पा राव के कार्यालय का ताला तोड़कर लगभग 20 से 30 हजार रुपये नकद और कई महत्त्वपूर्ण कागजात चोरी कर लिए।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात अप्पा राव कार्यालय बंद करने के बाद कुछ देर वहीं रुके और फिर घर चले गए थे। बताया गया कि नकद राशि कार्यालय की टेबल के दराज में रखी हुई थी। शुक्रवार सुबह आसपास के लोगों ने कार्यालय का ताला टूटा देखा और तुरंत इसकी जानकारी अप्पा राव को दी। जब वे मौके पर पहुंचे तो कार्यालय का सामान बिखरा हुआ मिला।
घटना की सूचना मिलते ही गोलमुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। अप्पा राव ने इस संबंध में थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर जल्द ही आरोपियों को पकड़ा जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद चोरों ने घटना को अंजाम दे दिया। बताया जा रहा है कि कार्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होने के कारण चोरों को इसका फायदा मिला। फिलहाल पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, ताकि चोरों का सुराग लगाया जा सके।
जमशेदपुर : बिरसानगर जोन नंबर 6B मुखी बस्ती निवासी अजय मुखी जो टाटा स्टील के प्रभाग अंतर्गत जुस्को के ठेकेदार अशोक कुमार के अधिन रंग रोगन का कार्य करते थे, आज अचानक सुबह 9:30 से 10 :00 बजे के मध्य कार्यस्थल पर ह्रदय गति रुक जाने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इसके समाचार मिलते ही बिरसानगर मुखी समाज के मुखिया मनोज मुखी के नेतृत्व में मुखी समाज का प्रतिनिधि मंडल पंहुचें। समाज के पदाधिकारी और ठेकेदार के बीच मध्यस्थता कर तत्काल दाह संस्कार हेतु नगद 15000/ पन्द्रह हजार रुपए अनुदान के रूप में सहयोग किये और श्राद्ध कर्म में भी सहयोग करने का आश्वासन दिया।
इस दौरान अनुसूचित जाति जिला महामंत्री सह भालूबासा के मुखिया पोरेश मुखी, सुरेश मुखी बर्मा माइंस के मुखिया, संदीप मुखी टिनपलेट के मुखिया, राकेश मुखी, मनोज मुखी, सुरज मुखी उपस्थित थे।
राजनीति में समय सबसे बड़ी कसौटी है और बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने दो दशक इस कसौटी पर खड़े होकर गुजारे हैं. लेकिन सवाल यह है-क्या जनता भी अब उन्हें उतना ही भरोसेमंद मानती है जितना पहले?
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकरआए तीन सर्वे इस सवाल का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं. बिहार चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले आई तीन प्रमुख सर्वे रिपोर्ट्स ने जो तथ्य सामने लाए हैं वो काफी चौंका रहे है. चाणक्य, पोलस्ट्रैट और आईएएनएस-मैटराइज… तीनों एजेंसियों के आंकड़ों का निचोड़ ऐसा है जो बिहार चुनाव को लेकर जनता क्या सोचती है, यह स्पष्ट रूप से जाहिर हो रहा है. दरअसल, विपक्ष जहां नीतीश कुमार को ‘थका हुआ’ नेता बता रहा है, वहीं सर्वे के नतीजे किसी और कहानी की ओर इशारा करते हैं.
बिहार चुनाव को लेकर तीन सर्वे एजेंसियों- चाणक्य, पोलस्ट्रैट और आईएएनएस-मैटराइज ने अपने आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, और वो इतना तो साफ-साफ बता रहे हैं कि 20 वर्षों के शासन के बावजूद नीतीश कुमार अब भी बिहार की जनता के सबसे भरोसेमंद चेहरा बने हुए हैं.खास बात यह है कि ऐसा तब है जब बीते दो-तीन वर्षों से विपक्ष लगातार उन्हें ‘थका हुआ’ और ‘रिटायरमेंट के लायक’ बताता रहा है, लेकिन सर्वे यह संकेत दे रहे हैं कि बिहार की जनता उन्हें अब भी ‘स्थिरता, सुशासन और भरोसे’ के प्रतीक के रूप में देखती है.
नीतीश लोकप्रिय, 46% की अब भी पहली पसंद
आईएएनएस-मैटराइज सर्वे के अनुसार, 46 प्रतिशत लोगों ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद बताया है, जबकि तेजस्वी यादव को केवल 15 प्रतिशत समर्थन मिला है. इस सर्वे में 73 प्रतिशत जनता ने माना कि नीतीश कुमार के शासनकाल में कानून-व्यवस्था बेहतर रही है, जबकि लालू यादव के दौर को केवल 12 प्रतिशत लोगों ने अच्छा माना. यह आंकड़ा दर्शाता है कि दो दशक पुराने ‘सुशासन बाबू’ का टैग आज भी जनता के मन में कायम है.
तीन सर्वे, एक नतीजा-बिहार में एनडीए को बढ़त
बिहार के तीनों प्रमुख सर्वे एनडीए को स्पष्ट बढ़त दे रहे हैं. आईएएनएस-मैटराइज के ओपिनियन पोल में एनडीए 153-164 सीटें तो इंडिया गठबंधन 76-87 सीटें दी गई हैं. वहीं, पोलस्ट्रैट के सर्वे में एनडीए 133-143 सीटें और इंडिया गठबंधन 93-102 दी जा रहीं हैं. जबकि चाणक्य के सर्वे आंकड़ों के अनुसार, एनडीए 128-134 सीटें जीत रहा है तो इंडिया गठबंधन 102-108 सीटों पर बढ़त प्राप्त करेगा. इन तीनों रिपोर्टों में एनडीए को बहुमत और नीतीश कुमार को लोकप्रिय नेता बताया गया है. इसका मतलब साफ है-जनता के लिए बिहार में अभी भी ‘परिवर्तन’ से ज्यादा ‘स्थिरता’ अहम है.
‘थके हुए नेता’ की राजनीति बनाम जनता की धारणा
बता दें कि तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर लगातार नीतीश कुमार की उम्र और सेहत पर तंज कसते रहे हैं. तेजस्वी प्राय: कहते हैं कि अब उन्हें (नीतीश कुमार) विश्राम लेना चाहिए और प्रशांत किशोर कहते हैं कि नीतीश कुमार राजनीति के अंत की ओर बढ़ रहे हैं. दोनों यही संकेत देने की कोशिश करते रहे हैं कि बिहार की जनता बदलाव चाहती है. लेकिन, सियासी सच्चाई यही है कि सर्वे इसके विपरीत तस्वीर पेश कर रहे हैं. वोटर नीतीश कुमार के अनुभव, स्थिरता और विकास के प्रतीक के तौर पर अब भी उन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं.
मोदी फैक्टर और बिहार में एनडीए गठबंधन का लाभ
सर्वे में यह भी जाहिर होता है कि लोग अनुभव को अधिक वरीयता दे रहे हैं. दरअसल, इन्हीं सर्वे रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 63 प्रतिशत लोगों ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का बिहार चुनाव पर सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में एनडीए को इसका सीधा लाभ मिल रहा है. नीतीश कुमार का संगठनात्मक नेटवर्क और पीएम मोदी की लोकप्रियता, दोनों मिलकर विपक्ष के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं. यही वजह है कि पोलस्ट्रैट के सर्वे में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है, लेकिन जनता मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में नीतीश कुमार को ही प्राथमिकता दे रही है.
जनता बदलाव नहीं, बल्कि बिहार में स्थिरता चाहती है
दरअसल, बिहार में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल पर लोग थकान से ज़्यादा भरोसे और निरंतरता की भावना से देख रहे हैं. महिलाओं की भागीदारी, शराबबंदी, पंचायत सशक्तिकरण और कानून-व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे अब भी उनकी पहचान बने हुए हैं. युवाओं में बेरोजगारी जैसे सवाल जरूर हैं, लेकिन सर्वे बताते हैं कि 26 से 59 वर्ष आयु वर्ग के मतदाता अब भी एनडीए के समर्थन में झुके हुए हैं.
नीतीश ‘एंटी-इनकंबेंसी’ के बावजूद ‘प्रो-स्टेबिलिटी’ का चेहरा
तीन अलग-अलग एजेंसियों के सर्वे में समान निष्कर्ष उभरना यह दिखाता है कि बिहार में नीतीश कुमार के प्रति नाराजगी नहीं, बल्कि भरोसे की भावना ज्यादा मजबूत है. विपक्ष भले उन्हें ‘थका हुआ’ बताने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन जनता अब भी मानती है कि नीतीश कुमार शासन का ऐसा चेहरा हैं, जिन पर संकट के समय भरोसा किया जा सकता है. कह सकते हैं कि- विपक्ष को नीतीश शायद थके हुए लगें, लेकिन बिहार की जनता अब भी उन्हीं के साथ चलने को तैयार दिखती है.
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग हो रही है। इसके मद्देनजर सुरक्षा कड़ी कई गई है, हर बूथ पर सशस्त्र बल तैनाती और वेबकास्टिंग व्यवस्था है। बिहार के पहले चरण में मिथिलांचल, कोसी, मुंगेर डिवीजन और भोजपुर बेल्ट की 121 सीटों पर चुनाव है।
इस फेज के कुल 1314 उम्मीदवारों में 122 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। आरजेडी सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव मैदान में है तो जेडीयू अपने कोटे की आधे से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पहले चरण में वर्तमान सरकार के दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, राजद नेता तेजस्वी यादव, उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव, बाहुबली अनंत सिंह समेत कई दिग्गज चुनावी मैदान में हैं।
दरभंगा, बिहार- पीठासीन अधिकारी शशि कुमार ने कहा, “हम पूरी तरह तैयार हैं, एजेंट आ चुके हैं… अभी तक हमें कोई समस्या नहीं हुई है… सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं।”
कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर लग रही है चुनाव
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महागठबंधन की तरफ आरजेडी 72 सीट पर चुनाव लड़ रही है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजमा रहे हैं। वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट है।
वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज में 57 सीट पर किस्मत आजमा रही है तो बीजेपी ने 48 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) भी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी पहले चरण की 8 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। साथ ही उनके सहयोगी चंद्र शेखर और स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारे हैं।
121 सीटों पर कैसा रहा था पिछला चुनाव
121 विधानसभा सीटों पर पिछली बार हुए चुनाव के नतीजे देखें तो महागठबंधन और एनडीए में कांटे की फाइट रही थी। महागठबंधन ने 61 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि एनडीए को 59 सीटें मिली थीं। एलजेपी पिछली बार अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी और उसे सिर्फ एक सीट मिली थी। पहले चरण की जिन 121 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उसमें सबसे ज्यादा सीटें आरजेडी ने 42 सीटों पर जीत का परचम फहराया था जबकि 32 सीटें बीजेपी ने जीती थीं। जेडीयू के 23 विधायक जीतकर आए थे और कांग्रेस के 8 विधायक थे। इसके अलावा माले के 7, वीआईपी के चार, सीपीआई और सीपीएम के दो-दो विधायक जीते थे। इसके अलावा एलजेपी एक सीट जीती थी।
बिष्टुपुर स्थित मिर्ची रेस्टोरेंट के पास देर रात एक युवक ने नशे की हालत में जमकर उत्पात मचाया। काले रंग की कार (JH05ED 5860) में सवार युवक ने सड़क के बीचोंबीच गाड़ी रोक दी, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक शराब के नशे में धुत था और आने-जाने वाले लोगों से बदसलूकी व झगड़ा करने लगा। भीड़ ने जब उसे समझाने की कोशिश की तो उसने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों ने आक्रोश में आकर युवक की पिटाई कर दी।
सूचना मिलते ही बिष्टुपुर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय ऐसे शराबी तत्व अक्सर इस क्षेत्र में उत्पात मचाते हैं, जिससे परिवारों और राहगीरों को परेशानी होती है। लोग पुलिस से ऐसे तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।