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तीसरी धारा न्यूज: चुनावी दंगल

रांची नगर निगम चुनाव: एक तरफ शादी और बीमारी के बहाने ‘ड्यूटी’ से दूरी, दूसरी तरफ वार्डों में ‘आधी आबादी’ की बुलंद आवाज

रांची | मुख्य संवाददाता

रांची नगर निगम चुनाव की रणभेरी बजते ही शहर में दो अलग-अलग तस्वीरें उभर रही हैं। एक ओर जिला प्रशासन चुनावी ड्यूटी के लिए 5500 कर्मियों को साधने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर शहर की गलियों में विकास और बदलाव की बयार बह रही है।

कार्मिक कोषांग में आवेदनों की बाढ़: “साहब! शादी है, पैर में दर्द है”

​प्रशासनिक गलियारों में चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए कर्मियों ने अजीबो-गरीब दलीलें दी हैं। कार्मिक कोषांग के पास आए आवेदनों में स्वास्थ्य और निजी कारणों की भरमार है:

​प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त बैकअप बल मौजूद है और गंभीर मामलों की जांच के बाद ही राहत दी जा रही है।

वार्डों में ‘विमर्श’ और ‘भितरघात’ का डर

​शहर के सभी 53 वार्डों में माहौल गरमा गया है। महापौर (मेयर) पद के प्रत्याशी हर वार्ड में अपना मजबूत आधार तलाश रहे हैं।

महिलाओं का संकल्प: “पिछलग्गू नहीं, लीडर बनें”

​इस बार वार्ड पार्षदों की रेस में महिला प्रत्याशियों का दबदबा दिख रहा है। वार्ड की युवतियों और महिलाओं के बीच एक स्पष्ट संदेश है:

“नई पार्षद सिर्फ पुरुषों के पीछे चलने वाली (पिछलग्गू) न हों। वे खुद निर्णय लें, मोहल्ले की समस्याओं पर स्टैंड लें और महिलाओं की आवाज बनकर मिसाल कायम करें।”

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