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तीसरी धारा न्यूज: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

RIMS की बदहाली: अल्ट्रासाउंड की फिल्म खत्म, जूनियर डॉक्टर हाथ से लिख रहे रिपोर्ट; मरीजों की जान और जेब दोनों पर संकट

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान रिम्स (RIMS) में इन दिनों मरीजों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो चल रही हैं, लेकिन जांच फिल्म (प्रिंट शीट) खत्म होने के कारण मरीजों को रिपोर्ट का प्रिंट नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि जूनियर डॉक्टर सादे कागज पर हाथ से लिखकर रिपोर्ट दे रहे हैं, जिसकी विश्वसनीयता और स्पष्टता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

हाथ से लिखी रिपोर्ट: न डॉक्टर समझ पा रहे, न मरीज

​अस्पताल सूत्रों के अनुसार, फिल्म की अनुपलब्धता के कारण रिम्स और सदर अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली 200 से अधिक जांचों का कोई विजुअल रिकॉर्ड मरीजों को नहीं मिल रहा है।

गरीबों की जेब पर भारी पड़ रही सरकारी ‘मुफ्त’ जांच

​रिम्स में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीजों को अब मजबूरी में निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

अव्यवस्था पर फूटा मरीजों का गुस्सा

​मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यह समस्या काफी दिनों से बनी हुई है। जांच सेंटर पर रोज बहस और हंगामा होता है, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द फिल्म की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि गरीबों का इलाज सुलभ हो सके।

तीसरी धारा कड़ा सवाल: क्या यही है हाई-टेक रिम्स?

​एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और हाई-टेक बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में एक अदद ‘प्रिंट शीट’ न होना प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?

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