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डिजिटल ब्लैकआउट का खतरा! क्या ईरान के कब्जे में होगा दुनिया का इंटरनेट? WhatsApp और UPI सेवाओं पर संकट की आहट

नई दिल्ली/दुबई: टेक जगत से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। जिस इंटरनेट, WhatsApp और ऑनलाइन बैंकिंग (UPI) पर आज दुनिया टिकी है, उस पर अब ईरान अपना नियंत्रण बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से आई इस रिपोर्ट ने वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।1 KRDXJUlO1Oj4t K 57yRXg

​होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया का ‘डिजिटल टोल गेट’

​ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समुद्र के नीचे बिछी उन अंडर-सी इंटरनेट केबल्स (Submarine Cables) पर अपना कंट्रोल करने की योजना बना रहा है, जिनसे होकर दुनिया का अधिकांश डेटा गुजरता है। ईरानी अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को एक ‘छिपे हुए डिजिटल हाईवे’ के रूप में देख रहे हैं।b 1

​आपको जानकर हैरानी होगी कि इन केबल्स के जरिए रोजाना लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर (100 खरब डॉलर) का वैश्विक वित्तीय लेन-देन होता है। ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले डेटा के लिए ‘डिजिटल टोल’ वसूलने की तीन चरणों वाली योजना (3-Phase Plan) पर काम कर रहा है।

​टेक दिग्गजों के लिए ‘ईरानी कानून’ की शर्त

​ईरान की इस योजना का असर केवल इंटरनेट की रफ्तार पर नहीं, बल्कि डेटा सुरक्षा और संप्रभुता पर भी पड़ेगा। ईरान की शर्तों के अनुसार:

  • ​मेटा (WhatsApp/FB), अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को ईरान के कानूनों के तहत काम करना पड़ सकता है।
  • ​इन केबलों की मरम्मत और रखरखाव (Maintenance) का पूरा जिम्मा ईरानी कंपनियों को सौंपना पड़ सकता है।
  • ​डेटा ट्रांसफर के बदले भारी-भरकम ‘ट्रांजिट फीस’ चुकानी पड़ सकती है।a 2

​आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर?

​अगर ईरान इस ‘डिजिटल टोल’ को लागू करता है, तो गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा:

  1. ​महंगे होंगे सब्सक्रिप्शन: गूगल वन (Google One), माइक्रोसॉफ्ट 365 जैसी सेवाओं के दाम बढ़ सकते हैं।
  2. ​बैंकिंग और UPI: वैश्विक डेटा रूटिंग बाधित होने से ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट (UPI) में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं।
  3. ​क्लाउड सर्विस: कंपनियों के लिए क्लाउड स्टोरेज महंगा हो सकता है, जिससे ऐप्स और सर्विसेज की कीमतें बढ़ेंगी।

​निष्कर्ष

​यदि ईरान अपनी इस योजना में सफल रहता है, तो यह वैश्विक इंटरनेट के विकेंद्रीकृत स्वरूप के लिए एक बड़ा झटका होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक दृष्टि से भी दुनिया को अस्थिर कर सकता है। क्या दुनिया के बड़े देश इस ‘डिजिटल घेराबंदी’ को रोकने के लिए आगे आएंगे? यह देखने वाली बात होगी।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़

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