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एक नई सोच, एक नई धारा

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन: क्या झारखंड में टूटेगा अवैध सिंडिकेट का तिलिस्म?

कोलकाता/रांची: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने 15 वर्षों के अंतराल के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की नींव रख दी है। भाजपा की इस संभावित जीत ने केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच फल-फूल रहे अवैध कारोबार के नेटवर्क में भी हड़कंप मचा दिया है।IMG 20260501 120910

​अवैध कारोबार पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी

सत्ता गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के एजेंडे में शामिल ‘राष्ट्रहित’ सर्वोपरि है, जिसके कारण तस्करी और अवैध गतिविधियों में शामिल तत्वों का मार्ग अब अवरुद्ध होना तय है। बंगाल में सरकार बदलने का सीधा असर झारखंड की महागठबंधन सरकार पर भी पड़ता दिख रहा है, जो अब नीतिगत और राजनीतिक मोर्चे पर घिरती नजर आ रही है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

​झारखंड के 10 जिलों पर विशेष नजर

​झारखंड का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। अवैध कारोबारियों के लिए झारखंड हमेशा से एक ‘सुरक्षित गलियारा’ रहा है। अब इन जिलों में चौकसी बढ़ाने की तैयारी है:

  • ​संताल परगना: साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा।
  • ​कोयलांचल और औद्योगिक बेल्ट: धनबाद, बोकारो, रामगढ़।
  • ​राजधानी और कोल्हान: रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम।

​पशु तस्करी: बांग्लादेश का सफर अब होगा नामुमकिन

​पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा का फायदा उठाकर तस्कर झारखंड के रास्ते पशुओं को सीमा पार कराते रहे हैं।

  • ​BSF को मिलेगी नई ताकत: जानकारों का मानना है कि राज्य में अनुकूल सरकार होने से सीमा सुरक्षा बल (BSF) को स्थानीय पुलिस का पूरा सहयोग मिलेगा।
  • ​पिछला रिकॉर्ड: अप्रैल 2025 में मालदा में 8 मवेशियों को छुड़ाया गया था, जो झारखंड के रास्ते पहुंचे थे। अब ऐसे मामलों पर नकेल कसने के लिए सीमावर्ती जिलों में सघन तलाशी अभियान की योजना है।

​बालू और पत्थर माफियाओं का टूटेगा गठजोड़

​झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच बालू, पत्थर और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की तस्करी का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

​सूत्रों का दावा: झारखंड के कई रसूखदार नेता इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल और झारखंड के नेताओं के बीच का यह ‘अवैध सिंडिकेट’ पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।

 

​राजनीतिक गलियारों में बेचैनी

​बंगाल के इस बदलाव ने झारखंड की राजनीति में ‘हवा का रुख’ मोड़ दिया है। राज्य के कई दिग्गज नेता अब अपने भविष्य के सफर को लेकर असमंजस में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की वर्तमान सरकार इस नए सुरक्षा और राजनीतिक दबाव का सामना कैसे करती है।

​ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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