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ग्लोबल क्रूड में उछाल: पेट्रोल-डीजल की कीमतों की अब हर 15 दिन में होगी समीक्षा, सरकार ने ड्यूटी में की ₹10 की कटौती

जमशेदपुर/नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों की हर पखवाड़े (15 दिन में) समीक्षा की जाएगी। यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच घरेलू बाजार को संतुलित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।n706197800177462023086151c12f6749c59e2c920b628f1e50c809ec2d1c7e677a8016252b3729b88104d2

​राजस्व को ₹7,000 करोड़ का नुकसान

​एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाधाओं से निपटना है। उन्होंने जानकारी दी कि पेट्रोल और डीजल पर ड्यूटी में की गई कटौती के कारण सरकार को अब तक कुल 7,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है।

​चतुर्वेदी ने कहा, “वर्तमान स्थिति काफी गतिशील है। यह सामान्य कामकाज जैसा समय नहीं है कि हम पहले से कोई सटीक अनुमान लगा सकें। हम एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं, इसलिए हर 15 दिन में आयात और घरेलू खपत के रुझानों का आकलन करना जरूरी हो गया है।”1002518072

​एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत नहीं

​सरकार ने घरेलू स्तर पर बड़े उपाय करते हुए पेट्रोल पर संशोधित उत्पाद शुल्क (Excise Duty) को 21.90 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 11.90 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। 10 रुपये की यह कटौती सीधे तौर पर तेल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को घाटे से बचाने के लिए की गई है।

​ध्यान देने वाली बात: इस कटौती का लाभ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा। यानी पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतों में फिलहाल कोई कमी नहीं आएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों की ‘अंडर-रिकवरी’ (बढ़ते घाटे) को थामना है ताकि देश में ईंधन की सप्लाई प्रभावित न हो।

​सप्लाई और स्टॉक पर सरकार का आश्वासन

​ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि:

  • ​घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • ​घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को देखते हुए कमर्शियल सप्लाई को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है।
  • ​वर्तमान में व्यापार की सुगमता को देखते हुए कमर्शियल सप्लाई को बढ़ाकर 70% तक कर दिया गया है।

​सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए और भी कड़े या राहत भरे फैसले लिए जा सकते हैं।

​रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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