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बड़ी खबर: क्या दुनिया ‘Energy Lockdown’ की ओर बढ़ रही है? फिलीपींस में नेशनल इमरजेंसी घोषित

मनीला/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में गहराते तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस ने मौजूदा संकट को देखते हुए देश में ‘राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल’ (National Energy Emergency) की घोषणा कर दी है। 2020 के कोविड संकट के बाद यह देश का पहला राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन जैसा कदम है।n70596139517745002974408d5d764c7635b78573657ee3a6f39057a19a05c796b75154137a5ddef12163a4

​क्यों लगा फिलीपींस में एनर्जी लॉकडाउन?

​ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह से मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटने के डर से सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है ताकि ईंधन की जमाखोरी रोकी जा सके और आवश्यक सेवाओं के लिए भंडार सुरक्षित रहे।1002518072

​क्या होता है Energy Lockdown?

​जब किसी देश की ऊर्जा सप्लाई (पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली) में अचानक बड़ी बाधा आती है, तो सरकारें संसाधनों को नियंत्रित करने के लिए ‘एनर्जी लॉकडाउन’ लगाती हैं। इसमें:

  • ​ईंधन की राशनिंग (सीमित बिक्री) की जा सकती है।
  • ​गैर-जरूरी उद्योगों में बिजली कटौती की जाती है।
  • ​परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लग सकते हैं।

​भारत के लिए कितनी गंभीर है चुनौती?

​भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 90% कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट संकट भारत के लिए दोहरे खतरे की घंटी है:

    1. ​स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz): दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत की सप्लाई लाइन कट सकती है।
    2. ​रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): भारत के पास फिलहाल केवल 9.5 दिनों का ही आपातकालीन तेल भंडार सुरक्षित है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और सप्लाई की कमी का संकट पैदा हो सकता है।

​प्रधानमंत्री का संदेश: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में इस स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि हमें कोरोना जैसी अनिश्चित चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।

 

​आम आदमी पर क्या होगा असर?

​अगर स्थिति ‘एनर्जी लॉकडाउन’ तक पहुँचती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ेगा। बिजली उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की रफ्तार थम सकती है।

​तीसरी धारा न्यूज इस वैश्विक संकट पर पल-पल की नजर बनाए हुए है।

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