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एक नई सोच, एक नई धारा

धर्मांतरण के बाद SC/ST एक्ट का लाभ नहीं: विहिप ने किया सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत

जमशेदपुर: विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अनुसूचित जाति (SC) के अधिकारों और धर्मांतरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। सिंहभूम विभाग के मंत्री अरुण सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह फैसला संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने वाला है।1002507138

​संविधान की मूल भावना की जीत

​विहिप नेता अरुण सिंह ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का यह निर्णय ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950’ के पूर्णतः अनुरूप है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं। धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति इस श्रेणी का हिस्सा नहीं रह जाता, इसलिए उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता।1002518072

​धर्मांतरण माफिया पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​अरुण सिंह ने ईसाई और मुस्लिम नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:

  • ​दोहरा मापदंड: एक ओर ये धर्म खुद को समतावादी बताते हैं और कहते हैं कि उनके यहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, वहीं दूसरी ओर ‘दलित ईसाई’ और ‘दलित मुस्लिम’ जैसे शब्द गढ़कर आरक्षण की मांग करते हैं।
  • ​कुचक्र पर चोट: विहिप का मानना है कि यह निर्णय उन ताकतों पर अंकुश लगाएगा जो धर्मांतरण के बाद भी पुरानी जातिगत पहचान का लाभ उठाकर संवैधानिक अधिकारों पर ‘डाका’ डालना चाहते हैं।

​वापसी पर ही मिलेंगे अधिकार

​विहिप ने सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार उस ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए हैं जो हिन्दू समाज की संरचना से उपजा था।

​”यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से अलग हो जाता है जिसके आधार पर ये अधिकार दिए गए थे। केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में ‘घर वापसी’ करने और समाज द्वारा स्वीकार किए जाने पर ही वह पुनः इन अधिकारों का पात्र बन सकता है।”

 

​विहिप बनाएगी ‘हकमारी’ करने वालों की सूची

​आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए अरुण सिंह ने कहा कि विहिप के कार्यकर्ता अब देशभर में ऐसे लोगों की पहचान करेंगे जिन्होंने धर्मांतरण के बावजूद अनुसूचित समाज के अधिकारों का गलत लाभ उठाया है। संगठन का लक्ष्य ऐसे लोगों से अधिकार छीनकर उन वास्तविक पात्रों को दिलाना है जो इसके हकदार हैं।

​रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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