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एक नई सोच, एक नई धारा

ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रहार: भारत समेत 16 देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ जांच शुरू, फिर बढ़ सकते हैं आयात शुल्क

​वाशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत सहित दुनिया की 16 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खिलाफ एक नई और व्यापक जांच शुरू करने का ऐलान किया है। ‘व्यापार अधिनियम 1974’ की धारा 301 (Section 301) के तहत शुरू की गई इस जांच का सीधा असर आने वाले समय में इन देशों से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पादों पर पड़ सकता है।

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​क्या है ‘सेक्शन 301’ और क्यों हो रही है जांच?

​अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के अनुसार, यह जांच मुख्य रूप से ‘अतिरिक्त उत्पादन क्षमता’ (Excess Capacity) को लेकर है। अमेरिका का आरोप है कि भारत, चीन और जापान जैसे देशों ने अपनी घरेलू मांग से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है, जो बाजार के संकेतों से मेल नहीं खाती।

​अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ये देश सब्सिडी और सरकारी नीतियों के जरिए अनुचित लाभ ले रहे हैं और अपना अतिरिक्त माल अमेरिकी बाजार में डंप कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी घरेलू उद्योगों और वहां के रोजगार को नुकसान हो रहा है।

​जांच के दायरे में कौन-कौन से देश?

​इस नई लिस्ट में एशिया और यूरोप के दिग्गज व्यापारिक साझेदार शामिल हैं:

  • ​एशिया: भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, कंबोडिया और बांग्लादेश।
  • ​यूरोप: यूरोपीय संघ (EU), स्विट्जरलैंड और नॉर्वे।
  • ​उत्तर अमेरिका: मैक्सिको। (नोट: दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े भागीदार ‘कनाडा’ को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है।)

​भारत के लिए नई चुनौती: ‘ऐतिहासिक समझौते’ पर संकट?

​यह जांच भारत के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि अभी पिछले महीने (फरवरी 2026) ही भारत और अमेरिका के बीच एक ‘ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौता’ हुआ था।

  • ​इस समझौते के तहत, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर प्रभावी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था।
  • ​यह राहत तब मिली थी जब भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
  • ​इससे पहले, अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ लगाया गया था।

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई जांच के परिणाम स्वरूप इस साल गर्मियों तक भारत पर फिर से नए आयात कर (Import Taxes) लग सकते हैं, जिससे हालिया समझौते से मिली राहत खत्म हो सकती है।

​ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य: ‘अमेरिका फर्स्ट’

​ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत वे अमेरिकी औद्योगिक आधार को मजबूत करना और सप्लाई चेन को वापस देश के भीतर लाना चाहते हैं।

​निष्कर्ष: यदि इस जांच के बाद अमेरिका नए प्रतिबंध या टैरिफ लगाता है, तो इसका असर न केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। आने वाले कुछ महीने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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