देहरादून/जमशेदपुर | 15 फरवरी, 2026
जमशेदपुर के चर्चित गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में हुई हत्या ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीसीटीवी कैमरों से लैस ‘सिल्वर सिटी मॉल’ जैसे इलाके में शूटरों ने बिना चेहरा ढके गोलियां क्यों बरसाईं? क्या यह उनकी नादानी थी या इसके पीछे कोई खौफनाक संदेश छिपा था?
चेहरा न छुपाने के पीछे के 3 संभावित कारण
पुलिस और क्राइम एक्सपर्ट्स इस ‘बेखौफ’ अंदाज के पीछे तीन थ्योरी देख रहे हैं:
- पहचान का भ्रम: जांच में पता चला है कि शूटर (विशाल और आकाशलाल) मूल रूप से जमशेदपुर के हैं लेकिन देहरादून के लिए नए चेहरे थे। उन्हें लगा होगा कि दूसरे राज्य में उन्हें कोई नहीं पहचानेगा।
- डर पैदा करना: अक्सर पेशेवर अपराधी चेहरा दिखाकर वारदात को अंजाम देते हैं ताकि विरोधी गुट और गवाहों के मन में दहशत बैठ जाए।
- गलतफहमी: सूत्रों के अनुसार, शूटरों को भरोसा था कि वे वारदात के तुरंत बाद नेपाल या किसी सुरक्षित ठिकाने पर निकल जाएंगे और पुलिस उन तक नहीं पहुँच पाएगी।
जांच की अब तक की 5 बड़ी बातें (Update)
पुलिस की एसआईटी (SIT) टीम ने इस केस में अब तक जो हासिल किया है, वह इस प्रकार है:
- 1. सगे भाई का सरेंडर: मुख्य साजिशकर्ता और विक्रम का छोटा भाई अरविंद शर्मा पुलिस की गिरफ्त में है। उसने कबूल किया है कि करोड़ों की संपत्ति और व्यापारिक रंजिश के कारण उसने ही हत्या की स्क्रिप्ट लिखी थी।
- 2. बनारस से गिरफ्तारियां: फरार शूटर विशाल (बागबेड़ा) और आकाशलाल (जुगसलाई) को बनारस से गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया जा रहा है।
- 3. डिजिटल फुटप्रिंट: पुलिस ने शूटरों के मोबाइल लोकेशन और हरिद्वार के उस होटल का डेटा रिकवर कर लिया है, जहाँ वे रुके थे। उनकी स्कूटी और बाइक के रूट का भी पता चल गया है।
- 4. जमशेदपुर कनेक्शन: साजिश की जड़ें जमशेदपुर के मानगो इलाके में मिली हैं। जुलाई 2025 में हुई एक गुप्त बैठक में इस कत्ल का ‘रेट’ और ‘डेट’ तय हुआ था।
- 5. ‘प्रभात’ की तलाश: पुलिस अब अरविंद के करीबी सहयोगी प्रभात की तलाश कर रही है, जिसकी आर्थिक स्थिति विक्रम की दखलंदाजी के कारण खराब हुई थी और जो इस हत्याकांड की एक अहम कड़ी है।
आगे क्या?
पुलिस अब गिरफ्तार शूटरों और अरविंद शर्मा को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या इस हत्याकांड के पीछे जमशेदपुर के किसी बड़े अंडरवर्ल्ड डॉन का हाथ तो नहीं, या यह केवल एक पारिवारिक और व्यापारिक रंजिश का नतीजा था।
तीसरी धारा का नज़रिया: बिना चेहरा ढके वारदात करना अपराधियों के अति-आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी गलती भी साबित हुई। अब पुलिस के पास पर्याप्त ‘विजुअल एविडेंस’ हैं, जिससे उन्हें अदालत में सजा दिलाना आसान होगा।
