Site icon

‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’: आज देशभर में ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, ठप रहेंगी कैब और बाइक-टैक्सी सेवाएं

article 73816589

नई दिल्ली/मुंबई: आज यानी शनिवार, 7 फरवरी को देशभर में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं (Ola, Uber, Rapido) का पहिया थम गया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और कई राष्ट्रीय मजदूर संगठनों ने मिलकर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण यात्रियों को कार, ऑटो और बाइक-टैक्सी की बुकिंग में भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

क्यों बंद हैं ऐप-आधारित टैक्सियां?

​ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां उनका “अंतहीन शोषण” कर रही हैं। हड़ताल के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. किराया नीति में मनमानी: ड्राइवरों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय नहीं है। कंपनियां अपनी मर्जी से कमीशन काटती हैं, जिससे ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है।
  2. पैनिक बटन का वित्तीय बोझ: महाराष्ट्र कामगार सभा के अनुसार, ड्राइवरों को 12,000 रुपये खर्च कर नए पैनिक बटन डिवाइस लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पहले लगाए गए कई डिवाइस को सरकार ने ‘अनधिकृत’ घोषित कर दिया है, जिसका खामियाजा ड्राइवरों को भुगतना पड़ रहा है।
  3. ओपन परमिट पॉलिसी: ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या और अवैध बाइक टैक्सियों के कारण पुराने ड्राइवरों की कमाई में भारी गिरावट आई है।
  4. बीमा का अभाव: यूनियन का आरोप है कि बाइक टैक्सी हादसों के पीड़ितों को उचित बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नितिन गडकरी को लिखा पत्र

​यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ‘इनकम इनसिक्योरिटी’ (आय की असुरक्षा) और खराब वर्किंग कंडीशन से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं।

यात्रियों के लिए क्या है स्थिति?

निष्कर्ष

​यह हड़ताल भारत में तेज़ी से बढ़ते ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) के भीतर गहरे असंतोष को दर्शाती है। यदि सरकार और कंपनियों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

Exit mobile version