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ट्रंप की करीबी लौरा लूमर ने पाकिस्तान को दिखाया आईना, शहबाज शरीफ के ‘शांति दूत’ बनने की कोशिशों पर बरसीं

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारी पड़ गया है। जहाँ एक ओर शरीफ ‘सार्थक वार्ता’ की मेजबानी के सपने देख रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और रिपब्लिकन नेता लौरा लूमर ने पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ बताते हुए कड़ी फटकार लगाई है।n7058893851774440971794a01763c9e4102ce42b52c87f6ab59d2a8c192bbcace8ebbbc18710c012404d77

“आतंकवादी पाकिस्तान को आईना देखना चाहिए”

​लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर शहबाज शरीफ के पोस्ट को शेयर करते हुए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान की साख पर सवाल उठाते हुए कहा:

क्या था शहबाज शरीफ का प्रस्ताव?

​पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश करते हुए कहा था कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो पाकिस्तान ‘निर्णायक वार्ता’ की मेजबानी को अपना सम्मान समझेगा। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजनयिक माध्यमों से संघर्ष समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

ट्रंप और पाक आर्मी चीफ के बीच ‘सीक्रेट’ बातचीत?

​ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी रविवार को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। रिपोर्टों के अनुसार:

  1. मध्यस्थता की गुहार: पाक सेना प्रमुख ने ट्रंप से अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया है।
  2. 15 मांगों की सूची: सीएनएन की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 मांगों की एक सूची भेजी है।

कौन हैं लौरा लूमर?

​लौरा लूमर को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘फायरब्रांड’ समर्थक माना जाता है। वह फ्लोरिडा से रिपब्लिकन उम्मीदवार रह चुकी हैं और हाल ही में भारत दौरे पर भी आई थीं। वह अपने कट्टर और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं, विशेषकर कट्टरपंथ और आतंकवाद के मुद्दों पर।

मौजूदा स्थिति: क्या टल जाएगा युद्ध?

​डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमलों को 5 दिनों के लिए स्थगित कर रहा है। ट्रंप ने इसे ‘सार्थक बातचीत’ का परिणाम बताया है। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में इस वार्ता का केंद्र बन पाता है या लौरा लूमर जैसे समर्थकों का दबाव ट्रंप को पाकिस्तान से दूर रखता है।

रिपोर्ट: अंतरराष्ट्रीय डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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