नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 16 अप्रैल को लोकसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना, बल्कि उन्होंने ‘राजनीतिक श्रेय’ (Credit) की राजनीति पर भी विराम लगाने का प्रयास किया।
श्रेय के विवाद पर पीएम का ‘ब्लैंक चेक’ ऑफर
विपक्ष द्वारा बिल का श्रेय लेने की कोशिशों पर कटाक्ष करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अगर बात सिर्फ क्रेडिट की है, तो आप ले लीजिए। यहाँ बैठा कोई भी व्यक्ति अपनी फोटो छपवा सकता है, मैं क्रेडिट देने के लिए आपको ब्लैंक चेक देने को तैयार हूँ।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि सरकार विज्ञापनों में विपक्ष की फोटो लगाने में भी संकोच नहीं करेगी, क्योंकि लक्ष्य राष्ट्रहित है, राजनीति नहीं।
भाषण की 5 बड़ी बातें:
- राष्ट्र की एकता सर्वोपरि: दक्षिण बनाम उत्तर की बहस और परिसीमन के विरोध पर पीएम ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संविधान ने हमें देश को ‘टुकड़े-टुकड़े’ में बांटने का अधिकार नहीं दिया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि परिसीमन से किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।
- नीति और नियत: अपनी ओबीसी पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी ‘सबका साथ, सबका विकास’ सुनिश्चित करना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब नियत साफ हो, तो शब्दों के खेल (गारंटी या वादे) की जरूरत नहीं पड़ती।
- महिलाओं की बुद्धिमत्ता पर भरोसा: कोटे के भीतर कोटे (Sub-quota) की मांग पर पीएम ने कहा, “देश की बहनों की बुद्धिमत्ता पर भरोसा रखें। पहले 33% महिलाओं को संसद आने दें, वे खुद अपने प्रतिनिधित्व का मार्ग तय करेंगी।”
- सामूहिक सफलता: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बिल का पारित होना मोदी या किसी एक दल की व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की जीत के रूप में इतिहास में दर्ज होगी।
- 30 साल का इंतज़ार खत्म करने का समय: उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पिछले तीन दशकों से लंबित है और अब इसे और टालना देश के हित में नहीं है। प्रक्रिया को और अधिक देरी से बचाने के लिए सामूहिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
सर्वसम्मति की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने सदन के सभी दलों से इस बिल को सर्वसम्मति से पारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब कोई निर्णय सर्वसम्मति से होता है, तो उसका प्रभाव और ताकत कई गुना बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने जहाँ सदन में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, वहीं विपक्षी दल अब भी इसके लागू होने की समयसीमा और परिसीमन की शर्तों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क
