फरार होकर भी मैदान में! वार्ड 32 की प्रत्याशी ममता देवी पर गैर-जमानती वारंट और कुर्की का आदेश, फिर भी कर रहीं चुनाव प्रचार
जमशेदपुर | मुख्य संवाददाता
जमशेदपुर के वार्ड नंबर 32 में पार्षद चुनाव के बीच एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव लड़ रही प्रत्याशी ममता देवी और उनके पति विनय सिंह के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट और कुर्की (धारा 82/83) का आदेश प्रभावी होने के बावजूद, उनकी गिरफ्तारी न होना पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है मामला? (मुकदमा संख्या: C1 539/15)
यह पूरा मामला ₹3,00,000 के चेक बाउंस से जुड़ा है, जो सेवानिवृत्त डीएसपी अशोक कुमार सिंह द्वारा दर्ज कराया गया था। पिछले 10 वर्षों से यह मामला जमशेदपुर न्यायालय में लंबित है, जिसमें आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय ने कई कड़े आदेश जारी किए हैं:
| तिथि | अदालती कार्रवाई / आदेश |
|---|---|
| 19 जून 2015 | गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी |
| 01 अगस्त 2016 | धारा 82 (फरारी की उद्घोषणा) |
| 30 अगस्त 2017 | धारा 83 (संपत्ति की कुर्की का आदेश) |
| 14 फरवरी 2023 | एसपी (SP) को आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु पत्र |
| 13 नवंबर 2025 | थाना प्रभारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause) |
पुलिस की भूमिका पर कोर्ट सख्त
हैरानी की बात यह है कि जिस प्रत्याशी के खिलाफ कुर्की जब्ती तक के आदेश जारी हैं, वह न केवल क्षेत्र में घूम रही हैं बल्कि वार्ड 32 से पार्षद पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर चुकी हैं। इस लापरवाही पर माननीय न्यायालय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है कि आखिर अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई।
25 फरवरी 2026: अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
माननीय न्यायालय रिचेस कुमार (प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, जमशेदपुर) की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को होनी है। कोर्ट ने आरोपियों को उपस्थिति हेतु अंतिम निर्देश दिए हैं।
तीसरी धारा का सवाल: कानून से ऊपर कौन?
एक तरफ प्रशासन निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर ‘फरार’ घोषित प्रत्याशी का खुलेआम चुनाव लड़ना चुनावी प्रक्रिया और पुलिस की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या 25 फरवरी से पहले पुलिस आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पाएगी?
