नई दिल्ली/दुबई | तीसरी धारा न्यूज: दुनिया की सबसे संवेदनशील जलसंधि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में जारी भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। जहाँ एक ओर खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक शिपिंग ठप पड़ी है, वहीं भारत के दो महत्वपूर्ण एलपीजी (LPG) टैंकरों ने अपनी यात्रा फिर से शुरू करने के संकेत दिए हैं। तीसरी धारा न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, यह घटनाक्रम भारत में गहराते रसोई गैस संकट को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ की वतन वापसी के संकेत
शिप-ट्रैकिंग डेटा (MarineTraffic) और अंतरराष्ट्रीय सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह हब के पास फंसे दो भारतीय एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ (Pine Gas) और ‘जग वसंत’ (Jag Vasant) ने शुक्रवार को अपनी यात्रा शुरू करने का ब्रॉडकास्ट (Broadcast) दिया है।
- जग वसंत: इसे भारत पेट्रोलियम (BPCL) द्वारा चार्टर किया गया है।
- पाइन गैस: इसे इंडियन ऑयल (IOC) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
दुनिया की 20% ऊर्जा का रास्ता और ईरान का रुख
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी गुजरता है। ईरान द्वारा जहाजों पर हमले की धमकी के बाद यहाँ सैकड़ों जहाज लंगर डाले खड़े हैं। तीसरी धारा न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, जहाँ कच्चे तेल (Crude Oil) के टैंकर अभी भी अपनी जगह पर ठप हैं, वहीं भारतीय गैस टैंकरों का आगे बढ़ना भारत की मजबूत विदेश नीति और कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है। पिछले हफ्ते भी ईरान ने दो भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया था।
प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय मुस्तैद
भारत सरकार इस पूरे मामले को उच्चतम स्तर पर देख रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत खाड़ी में मौजूद अपने 22 जहाजों के बेड़े की ‘सुरक्षित और बेरोकटोक आवाजाही’ के लिए प्रतिबद्ध है।
तीसरी धारा न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं वैश्विक नेताओं के साथ संपर्क में हैं ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित गलियारा मिल सके और देश में एलपीजी की किल्लत न हो।
शनिवार को रवाना हो सकते हैं जहाज
व्यापारिक सूत्रों का मानना है कि ये दोनों गैस टैंकर शनिवार को अपनी अंतिम यात्रा पर निकल सकते हैं। हालांकि, शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा है कि विस्तृत जानकारी जल्द ही साझा की जाएगी, लेकिन वर्तमान संकेत भारत के पक्ष में बेहद सकारात्मक हैं।
