जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर में आयोजित ‘नानी बाई को मायरो’ कथा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु की आंखें नम कर दीं। यह भावुक क्षण था विख्यात कथावाचिका जया किशोरी जी और जमशेदपुर की किशोरी देवी जी के मिलन का।
रिश्ता जो शब्दों से परे है
किशोरी देवी जी और जया किशोरी के बीच का संबंध बेहद गहरा और आत्मीय है। जया किशोरी अक्सर उन्हें अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करती हैं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से किशोरी देवी हर जगह नहीं पहुंच पातीं। जब जमशेदपुर की कथा में दोनों का सामना हुआ, तो जया किशोरी अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाईं और दौड़कर किशोरी माता को गले लगा लिया। यह दृश्य भक्ति और वात्सल्य के मिलन का प्रतीक बन गया।
वैराग्य और भक्ति का मार्ग
किशोरी देवी जी का जीवन अब पूरी तरह आध्यात्म को समर्पित है। तीन वर्ष पूर्व अपने पति स्वर्गीय यदुवंश सिंह के असामयिक निधन के बाद, उन्होंने संसार से दूरी बना ली।
- सात्विक जीवन: वे दिन में केवल एक समय का भोजन करती हैं।
- अखंड भक्ति: उनका पूरा दिन राधा रानी की भक्ति और श्री कृष्ण की जुगल लीला के स्मरण में बीतता है।
- तीर्थाटन: पति के निधन के पश्चात उन्होंने देश के लगभग सभी प्रमुख तीर्थों और संतों के दर्शन किए।
प्रेमानंद महाराज से प्रेरणा और संकल्प
किशोरी माता जी, वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से अत्यंत प्रभावित हैं। जिस प्रकार महाराज जी अपने धाम को छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाते, उसी तरह किशोरी देवी जी ने भी एक कड़ा संकल्प लिया है। उन्होंने प्रण किया है कि वे अब अपनी जन्मभूमि (छपरा, बिहार) और अपने परिवार (पुत्र उदय प्रताप सिंह एवं अभय प्रताप सिंह) की कर्मभूमि जमशेदपुर को छोड़कर कहीं बाहर नहीं जाएंगी।
आज वे अपने निवास स्थान पर ही रहकर राधा-कृष्ण की भक्ति में लीन रहती हैं, जहाँ उनसे आशीर्वाद लेने के लिए परिवार के साथ-साथ शहर के अन्य गणमान्य लोग भी पहुंचते रहते हैं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
