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तीसरी धारा न्यूज: कानून का शिकंजा

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30 लाख के गबन का मामला: मुजफ्फरपुर की महिला समेत दो की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने फर्जी हस्ताक्षर को माना गंभीर

जमशेदपुर | विधि संवाददाता

जमशेदपुर की जिला अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश (तृतीय) नीति कुमारी की अदालत ने धोखाधड़ी और गबन के एक बड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर (बरियारपुर) निवासी आरोपी सुषमा पांडे और रंजीत कुमार की अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है। वहीं, इसी मामले के दो अन्य आरोपियों को सशर्त राहत दी गई है।

क्या है पूरा मामला?

​सोनारी स्थित ‘केयर ट्रेडर्स’ के मालिक संजय कुमार ने साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके अनुसार:

अदालत का फैसला और शर्तें

​अदालत ने दलीलों को सुनने के बाद दो अलग-अलग आदेश पारित किए:

  1. जमानत खारिज: मुख्य भूमिका में नजर आ रहे सुषमा पांडे और रंजीत कुमार की जमानत याचिका रद्द कर दी गई।
  2. सशर्त जमानत मंजूर: आरोपी निशांत कुमार और आयुष कुमार की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली गई है।
    • शर्त: उन्हें 3 सप्ताह के भीतर अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) करना होगा और जांच अधिकारी (अनुसंधानक) को सहयोग देना होगा।

पक्ष और विपक्ष की दलीलें

​सूचक (संजय कुमार) की ओर से अदालत में अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, पूर्व लोक अभियोजक सुशील कुमार जायसवाल और अधिवक्ता बबीता जैन ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि फर्जी हस्ताक्षर के जरिए करोड़ों के टर्नओवर वाले काम में लाखों का गबन करना एक सुनियोजित साजिश है।

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