नई दिल्ली / जमशेदपुर: देशभर में पुलिस और जांच एजेंसियों को जल्द ही एक ऐसी कमाल की तकनीक मिलने वाली है, जिससे उनका काम न सिर्फ बेहद आसान हो जाएगा बल्कि अपराधियों पर भी शिकंजा कसना तेज होगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने एक नया डिजिटल हथियार ‘अभिज्ञान’ (Abhigyan) ऐप तैयार किया है, जिसे गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लॉन्च किया।
यह तकनीक मूल रूप से एक पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर की तरह काम करेगी, जो सीधे स्मार्टफोन के जरिए 1.3 करोड़ आपराधिक संदिग्धों और दोषियों के राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ी होगी।
सड़क पर चलते-चलते ही हो सकेगी संदिग्धों की चेकिंग
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को किसी संदिग्ध की पहचान करने के लिए उसे थाने लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 35 सेकंड में परिणाम: इस ऐप की मदद से पुलिस सड़क चलते भी किसी संदिग्ध को रोककर उसके अंगूठे के निशान (बायोमेट्रिक) ले सकेगी। ऐप के डेमो में देखा गया है कि फिंगरप्रिंट डेटाबेस से मैच होने में महज 35 सेकंड का समय लगता है।
- तुरंत सामने आएगा इतिहास: चंद सेकंड के भीतर ही पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन पर संदिग्ध का पूरा आपराधिक इतिहास देख सकेंगे, जिससे वांटेड अपराधियों और भगोड़ों को पकड़ना बेहद आसान हो जाएगा।
- तुरंत सामने आएगा इतिहास: चंद सेकंड के भीतर ही पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन पर संदिग्ध का पूरा आपराधिक इतिहास देख सकेंगे, जिससे वांटेड अपराधियों और भगोड़ों को पकड़ना बेहद आसान हो जाएगा।
स्मार्टफोन पर रियल-टाइम पहचान, डेटाबेस है बेहद मजबूत
वर्तमान व्यवस्था की बात करें तो फिंगरप्रिंट चेक करने की सुविधा देशभर के थानों और जिला मुख्यालयों में लगे मात्र 1,556 वर्कस्टेशनों पर ही उपलब्ध है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध का रिकॉर्ड जांचने के लिए उसे थाने ले जाना अनिवार्य होता था।
सुरक्षा और डेटा का बड़ा नेटवर्क
यह नया ऐप सीधे ‘नाफिस’ (NAFIS) सेंट्रल प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। इस डेटाबेस में वर्तमान में 9.91 लाख नशीले पदार्थों के तस्करों, 3.65 लाख मानव तस्करी के आरोपियों और जेल के कैदियों का विशाल डेटा शामिल है। सुरक्षा के लिहाज से यह ऐप पूरी तरह ‘टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन’ से सुरक्षित है और रियल टाइम में सटीक रिजल्ट देती है।
पुलिस को आधुनिक बनाने और सजा दिलाने पर जोर
अभिज्ञान ऐप को लॉन्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सिर्फ अपराधियों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि कानून के दायरे में तय समय सीमा के भीतर उन्हें कड़ी सजा दिलाना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने जांच में आधुनिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट, डीएनए (DNA), मोबाइल टावर डेटा, फेशियल रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसे वैज्ञानिक सबूतों को अगर चार्जशीट का हिस्सा बनाया जाए, तो अदालत में अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना और आसान हो जाएगा। इस नई तकनीक के आने से भारतीय पुलिसिंग के इतिहास में एक नया और आधुनिक अध्याय शुरू होने जा रहा है।
तीसरी धारा न्यूज
