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टाटा स्टील ने ओडिशा सरकार के नोटिस को कोर्ट में दी चुनौती

कंपनी पर खान विकास एवं उत्पादन समझौते (एमडीपीए) के तहत अपने डिस्पैच से संबंधित दायित्वों को पूरा नहीं करने का है आरोप

टाटा स्टील ने ओडिशा सरकार की ओर से भेजे गये 2410.89 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस को कटक स्थित ओडिशा हाइकोर्ट में चुनौती दी है.

इसकी जानकारी कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और चीफ लीगल ऑफिसर पार्वथीसम कांचीनाधाम ने दी है. उन्होंने बताया है कि कंपनी की ओर से ओडिशा सरकार, केंद्रीय खनन मंत्रालय, ओडिशा के डायरेक्टर ऑफ माइंस और ओडिशा जाजपुर के डिप्टी डायरेक्टर माइंस के खिलाफ याचिका कटक स्थित ओडिशा हाइकोर्ट में दायर की है. टाटा स्टील लिमिटेड को 2,410.89 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस मिला है. कंपनी को 3 अक्टूबर को जाजपुर स्थित खान उप निदेशक कार्यालय से यह आदेश मिला था. यह नोटिस कंपनी के सुकिंदा क्रोमाइट ब्लॉक से पांचवें ऑपरेशनल इयर, 23 जुलाई 2024 से 22 जुलाई 2025 तक, क्रोम अयस्क डिस्पैच में कथित कमी के कारण मिला है. यह डिमांड, मिनरल (परमाणु एवं हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों के अलावा) रियायत नियम, 2016 के रूल 12ए के तहत है.

अधिकारियों का आरोप है कि कंपनी ने खान विकास एवं उत्पादन समझौते (एमडीपीए) के तहत अपने डिस्पैच से संबंधित दायित्वों को पूरा नहीं किया. टाटा स्टील का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा उठायी गयी मांग में “कोई लॉजिक या ठोस आधार नहीं है ” और उसके पास इस मामले को कानूनी और गुण-दोष, दोनों ही आधारों पर चुनौती देने के लिए ठोस आधार हैं, इसलिए कंपनी ने कहा कि वह संबंधित न्यायिक या अर्ध-न्यायिक मंचों के सामने उचित कानूनी कदम उठा रही है. इससे पहले टाटा स्टील ने ओडिशा राज्य द्वारा चौथे वर्ष के लिए की गयी इसी तरह की मांग को पहले ही ओडिशा हाइकोर्ट में दायर एक रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी है. कोर्ट ने इस मामले में अपने आदेश द्वारा सरकारी अधिकारियों पर बलपूर्वक कार्रवाई करने पर अंतरिम रोक लगा दी है.

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