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सरायकेला-खरसावां में फैक्ट्रियों के ‘काले धुएं’ से घुट रहा दम: मानवाधिकार सहायता संघ ने प्रदूषण बोर्ड से की सख्त कार्रवाई की मांग

सरायकेला/आदित्यपुर: सरायकेला-खरसावां जिला इन दिनों औद्योगिक विकास की चमक के पीछे ‘काले धुएं’ की चादर में लिपटा नजर आ रहा है। जिले के आदित्यपुर, गम्हरिया, कांड्रा, कोलाबिरा, मुड़िया और सीनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले काले धुएं ने आम जनजीवन को नरक बना दिया है। इस गंभीर समस्या को लेकर मानवाधिकार सहायता संघ (अंतरराष्ट्रीय) की जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती सुमन कारूवा ने आवाज उठाई है।

घरों में कालिख और सेहत पर वार

​श्रीमती सुमन कारूवा ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निदेशक को पत्र लिखकर जिले के बिगड़ते हालात से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले बेतहाशा धुएं के कारण लोगों के घरों की दीवारें और छतें काली पड़ रही हैं। आलम यह है कि बाहर सूख रहे कपड़ों पर कालिख की परत जम रही है।

​प्रदूषण का असर केवल संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सेहत के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्र के निवासियों में:

कानूनों की उड़ रही धज्जियां

​श्रीमती कारूवा ने स्पष्ट किया कि फैक्ट्रियों का यह रवैया एयर एक्ट 1981, वाटर एक्ट 1974 और पर्यावरण संरक्षण एक्ट 1986 का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने प्रदूषण बोर्ड और जिला प्रशासन से मांग की है कि इन क्षेत्रों का तत्काल ‘स्पॉट निरीक्षण’ (Spot Inspection) किया जाए और नियमों की अनदेखी करने वाली फैक्ट्रियों पर अति सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

स्वच्छ हवा का अधिकार

​मानवाधिकार सहायता संघ ने जिला प्रशासन से अपील की है कि इस ज्वलंत जनसमस्या को शीघ्र संज्ञान में लिया जाए। जिले के नागरिकों को संविधान के तहत स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण में रहने का अधिकार है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

तीसरी धारा न्यूज़ की अपील: विकास की दौड़ में पर्यावरण और इंसानी जान की कीमत नहीं चुकाई जानी चाहिए। प्रशासन को प्रदूषण मानकों की कड़ाई से जांच करनी चाहिए।

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