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सोनारी दोमुहानी: आस्था पर भारी पड़ी प्रशासनिक अनदेखी, गंदगी के अंबार के बीच अर्घ्य देने को विवश हुए श्रद्धालु

जमशेदपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान जहां एक ओर पूरे शहर में सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, वहीं सोनारी स्थित दोमुहानी छठ घाट की बदहाली ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। घाट पर पसरी गंदगी और कुप्रबंधन के कारण छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

गंदगी के बीच सूर्योपासना, श्रद्धा हुई शर्मसार

​सोनारी दोमुहानी घाट, जो शहर के प्रमुख घाटों में से एक है, वहां इस बार गंदगी का अंबार लगा रहा। श्रद्धालु कचरे और सड़ांध के बीच भगवान भास्कर को अर्घ्य देने को मजबूर दिखे। प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय द्वारा समय रहते सफाई न कराए जाने के कारण श्रद्धालुओं में गहरा रोष देखा गया।

विसर्जित मूर्तियों से बढ़ा खतरा: कई श्रद्धालु हुए चोटिल

​सबसे गंभीर लापरवाही विसर्जित मूर्तियों को लेकर सामने आई। घाट के किनारे विसर्जित की गई मूर्तियों के अवशेष और उनके ढांचे की सफाई नहीं की गई थी।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने जताया विरोध

​घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं का कहना था कि हर साल यहां हजारों की भीड़ उमड़ती है, फिर भी प्रशासन ने सुरक्षा और सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि विसर्जन के बाद से ही मूर्तियां उसी अवस्था में पड़ी रहीं, जिसे हटाने की जहमत किसी विभाग ने नहीं उठाई।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

​छठ जैसे बड़े पर्व के लिए विशेष बजट और सफाई अभियान चलाने का दावा करने वाला नगर निकाय इस बार दोमुहानी घाट के मामले में पूरी तरह विफल नजर आया। विसर्जन के बाद घाटों के सौंदर्यीकरण और सफाई के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

तीसरी धारा न्यूज का सवाल: क्या प्रशासन केवल वीआईपी घाटों की सफाई तक सीमित है? दोमुहानी जैसे महत्वपूर्ण घाट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वच्छता से यह खिलवाड़ क्यों?

 

रिपोर्ट: ग्राउंड जीरो, तीसरी धारा न्यूज (जमशेदपुर)

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