नई दिल्ली: अपनी शानदार कॉमेडी से करोड़ों दिलों को जीतने वाले अभिनेता राजपाल यादव के लिए ‘अता पता लापता’ फिल्म का कर्ज अब जी का जंजाल बन गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के पालन में राजपाल यादव ने गुरुवार को जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उनके द्वारा दी गई किस्तों और आश्वासनों को नाकाफी बताते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।
कोर्ट रूम ड्रामा: 25 लाख का चेक भी नहीं आया काम
सरेंडर करने के बाद राजपाल यादव व्यक्तिगत रूप से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे 25 लाख रुपये का चेक साथ लाए हैं और बाकी की रकम भी जल्द चुका देंगे। हालांकि, कोर्ट का रुख सख्त रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि:
- किसी भी राहत पर विचार करने से पहले सरेंडर अनिवार्य है।
- बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान नहीं किया गया।
- मौजूदा समय में उन पर लगभग 9 करोड़ रुपये का बकाया है।
“अदालत के साथ लुका-छिपी नहीं”: कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव की सजा को जून 2024 में सिर्फ इसलिए रोका गया था ताकि वे मामला सुलझा सकें। कोर्ट ने अभिनेता की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जिसमें डिमांड ड्राफ्ट में ‘तकनीकी गलती’ का बहाना बनाया गया था। कोर्ट के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने और वरिष्ठ वकीलों के जरिए झूठे वादे करने के बाद अब रियायत की कोई जगह नहीं बची है।
क्या है 16 साल पुराना यह विवाद?
इस पूरे मामले की जड़ें साल 2010 से जुड़ी हैं:
- कर्ज की शुरुआत: राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
- चेक बाउंस: फिल्म के फ्लॉप होने के बाद जब कर्ज चुकाने के लिए चेक दिए गए, तो वे बैंक में बाउंस हो गए।
- सजा का ऐलान: साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
- ब्याज का बोझ: समय बीतने और भुगतान न होने के कारण 5 करोड़ की यह राशि अब करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।
अब आगे क्या?
कोर्ट ने आदेश दिया है कि राजपाल यादव को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा काटनी होगी। साथ ही, रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
