बीपीएल बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के मामले में जमशेदपुर के निजी अंग्रेजी स्कूल एवं राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दोनों पक्ष इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं।
शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (एजेयूपीईआई) ने घोषणा कर दी कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि संगठन अब विचार कर रहा है कि निजी स्कूलों में या तो आगे बीपीएल छात्रों का नामांकन न लिया जाए अथवा मामले को न्यायालय में ले जाकर समाधान प्राप्त किया जाए। शुक्रवार को इसको लेकर बिष्टूपुर स्थित नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में एसोसिएशन की बैठक हुई।
इसमें एजेयूपीईआई के अध्यक्ष नकुल कमानी, उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, मानद सचिव डॉ. श्रीकांत नायर, मानद कोषाध्यक्ष आरके झुनझुनवाला, बी. चंद्रशेखर, टीना बोधनवाला, राजीव तलवार, दिवाकर सिंह, केपीजी नायर एवं शरद चंद्रन नायर शामिल हुए। बैठक के बाद संवाददाताओं को एसोसिएशन के सदस्यों ने बीपीएल बच्चों की फीस के रीइंबर्शमेंट यानी प्रतिपूर्ति को लेकर 17 नवंबर 2025 को शिक्षा विभाग से जारी पत्र के बारे में जानकारी दी और इसपर चिंता जाहिर की। ज्ञान तनेजा व श्रीकांत नायर ने बताया कि इस पत्र में राज्य सरकार द्वारा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) छात्रों के लिए निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति देने से स्कूलों को इनकार करने की जानकारी दी गई है। इसका कारण यह बताया गया कि संबंधित विद्यालय टाटा स्टील से लीज पर प्राप्त सरकारी भूमि पर स्थित हैं, इसलिए उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय की श्रेणी में रखा गया है और इस आधार पर आगे किसी प्रकार की प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं हैं। सरकार के इस आदेश की पुन : समीक्षा की मांग जमशेदपुर के स्कूलों में सरकार के इस आदेश से असंतोष है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय की समीक्षा की मांग की है और इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंचित वर्ग के छात्रों को सहयोग दिया जाना आवश्यक है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऐसी योजनाओं पर निर्भर है। संवाददाता को एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, जो 27 अगस्त 2009 को लागू हुआ, उसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। झारखंड सरकार ने 11 मई 2011 को प्रकाशित राजपत्र के माध्यम से आरटीई अधिनियम को लागू कर यह भी स्पष्ट किया कि 3 से 4 वर्ष की आयु के बच्चों को भी प्रवेश स्तर पर शामिल किया जाएगा। पहले हुआ भुगतान, 2020 से करोड़ों रुपये फंसे राज्य सरकार ने 2010 से निजी स्कूलों को बीपीएल छात्रों की फीस का रीइंबर्शमेंट (प्रतिपूर्ति) देना शुरू किया, जो प्रति छात्र ₹425 प्रति माह निर्धारित किया गया। इस प्रकार सरकार प्रति छात्र ₹425 प्रति माह की राशि देने लगी, लेकिन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के तहत राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2020 से बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान बंद कर दिया। इसका उल्लेख निदेशक राज्य शिक्षा विकास विभाग द्वारा जारी पत्र में किया गया है। पत्र में जिला शिक्षा अधीक्षक को यह निर्देश दिया गया कि जिन विद्यालयों को झारखंड सरकार से भूमि या किसी भी प्रकार का अन्य लाभ प्राप्त हुआ है, उन्हें बीपीएल छात्रों की ट्यूशन फीस का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। इससे जमशेदपुर के स्कूलों को भुगतान नहीं किया गया। निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने का दिया हवाला बीपीएल बच्चों के एवज में प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने की बात कही। कहा कि जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां यह समस्या सामने आई है। निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कहा कि किसी भी स्कूल को सरकार से न तो जमीन मिली है और न ही किसी प्रकार की सहायता। कुछ विद्यालय टाटा स्टील से वार्षिक किराये पर ली गई भूमि पर संचालित हो रहे हैं।
