पतरातू (रामगढ़): झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत हेसला पंचायत में सोमवार को उस समय तनाव व्याप्त हो गया, जब पीटीपीएस (PTPS) की अधिग्रहित जमीन पर बने आवासीय परिसर को खाली कराने की सूचना जंगल की आग की तरह फैल गई। प्रशासन द्वारा 6 अप्रैल (सोमवार) को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की खबर मिलते ही हजारों की संख्या में स्थानीय निवासी सड़कों और गलियों में उतर आए।
पटेल चौक बना आंदोलन का केंद्र
जैसे ही बेदखली की आहट हुई, कॉलोनी के निवासी अपने घरों से निकलकर मुख्य स्थल पटेल चौक पर जमा हो गए। प्रदर्शन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भारी भागीदारी देखी गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दो-टूक शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपने आशियाने खाली नहीं करेंगे।
क्यों शुरू हुआ यह विवाद? (जमीन का गणित)
विवाद की जड़ पीटीपीएस पावर प्लांट के बंद होने के बाद जमीन का हस्तांतरण है:
- जियाडा को हस्तांतरण: पावर प्लांट बंद होने के बाद सरकार ने यह जमीन जियाडा (झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण) को सौंप दी थी।
- निजी कंपनियों को आवंटन: जियाडा ने इस भूमि को विभिन्न निजी कंपनियों को उद्योग लगाने के लिए आवंटित कर दिया है।
- बेदखली की कोशिश: इसी आवंटन के आधार पर प्रशासन लंबे समय से इन आवासों को खाली कराने का प्रयास कर रहा है।
कोर्ट का स्टे या प्रशासनिक आदेश? भ्रम बरकरार
इस पूरे मामले में कानूनी दांव-पेंच को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं:
- निवासियों का पक्ष: स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और अदालत ने फिलहाल किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक (Stay) लगा दी है।
- प्रशासन का पक्ष: अंचल अधिकारी का कहना है कि प्रशासन को अभी तक अदालत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ‘स्थगन आदेश’ प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए वे नियमानुसार जमीन खाली कराने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
टकराव की आशंका, प्रशासन अलर्ट
समाचार लिखे जाने तक हालांकि कोई बड़ा प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था, लेकिन पटेल चौक पर ग्रामीणों का हुजूम डटा हुआ है। क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती और किसी भी संभावित टकराव को देखते हुए स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ग्रामीण एकजुट होकर किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
