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झारखंड के महानायक ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण: कारूवा समाज ने जताई खुशी, कहा— पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण

तीसरी धारा न्यूज (सरायकेला):

​झारखंड राज्य गठन के आंदोलन के महानायक, आदिवासियों और मूलवासियों के हक-अधिकारों तथा ‘जल, जंगल, जमीन’ की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पॉद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों दिशोम गुरु की पत्नी रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।

​दिशोम गुरु को मरणोपरांत यह सर्वोच्च सम्मान मिलने पर पूरे झारखंड सहित सरायकेला क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। इस ऐतिहासिक क्षण पर मूलनिवासी कारूवा समाज ने अपनी गहरी खुशी और आभार व्यक्त किया है।

​झारखंड के संघर्ष और अस्मिता को मिला सर्वोच्च सम्मान

​इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मूलनिवासी कारूवा समाज के प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री गुरुचरण मुखी ने हर्ष जताते हुए कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलना हर एक झारखंडी के लिए सर्वोच्च सम्मान की बात है। यह न केवल उनके दशकों लंबे त्याग और संघर्ष का सम्मान है, बल्कि यह पूरे झारखंड राज्य को गौरवान्वित करने वाला क्षण है।

​उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन दबे-कुचलों, आदिवासियों और मूलवासियों की आवाज बुलंद करने में समर्पित कर दिया था। आज देश के सर्वोच्च स्तर पर उनके योगदान को सराहा जाना इस बात का प्रतीक है कि जन-आंदोलनों और जन-नेताओं का संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।

​जल, जंगल, जमीन की लड़ाई के प्रतीक थे ‘दिशोम गुरु’

​स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि दिशोम गुरु का नाम झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

समाज में उत्सव का माहौल: इस सम्मान के बाद सरायकेला और आस-पास के क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा खुशियां मनाई जा रही हैं। लोगों का मानना है कि महामहिम राष्ट्रपति के हाथों रूपी सोरेन द्वारा यह सम्मान लिया जाना झारखंड की सांस्कृतिक और राजनीतिक अस्मिता के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला पल है।

 

— तीसरी धारा न्यूज

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