जमशेदपुर। सनातन परंपरा में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। यह दिन न केवल पवित्र स्नान-दान के लिए, बल्कि महान समाज सुधारक संत शिरोमणि रविदास (रैदास) की जयंती के लिए भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस अवसर पर समाजसेवी निताई चंद्र सासमल ने संत रविदास के चरणों में नमन करते हुए उनके आदर्शों को याद किया।
समाज सुधार में संत रविदास का योगदान
निताई सासमल ने कहा कि संत रविदास ने भक्ति आंदोलन के जरिए समाज में व्याप्त भेदभाव, ऊंच-नीच और कुरीतियों को दूर करने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से समाज को मानवता और समानता का मार्ग दिखाया।
“मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदेश
संत रविदास के सबसे प्रसिद्ध दोहे का जिक्र करते हुए सासमल ने बताया कि:
- आत्मिक शुद्धि: यदि इंसान का मन पवित्र और निर्मल है, तो उसे कहीं और भटकने की आवश्यकता नहीं है।
- कर्म की पूजा: पवित्र मन से किया गया कोई भी कार्य गंगा के समान पूजनीय होता है।
- प्रासंगिकता: उनके विचार आज के आधुनिक युग में भी लोगों को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान कर रहे हैं।
रविदास समाज के साथ एकजुटता का संकल्प
समाजसेवी निताई सासमल ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे रविदास समाज के हर सुख-दुख में एक भाई और परिवार के सदस्य की तरह सदैव साथ खड़े रहेंगे। समाज के उत्थान के लिए वे निरंतर प्रयासरत हैं।
उपस्थिति:
इस अवसर पर मुख्य रूप से सुरेश रविदास, गणेश रविदास, अजय रविदास, राणी मुखी, आकाश दास, नारायण दास, जगदीश चंद्र दास, सतीश जायसवाल, नारायण सिंह और वीर बहादुर सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
