जमशेदपुर: युवाओं और समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसमें आधुनिक तकनीक के समन्वय को लेकर जमशेदपुर के पोखारी स्थित नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय (NSU) में एक बड़ा आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ मेंटल हेल्थ एंड अलाइड हेल्थ फाउंडेशन’ के सहयोग से दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला “माइंडटेक: रीइमेजिनिंग मेंटल हेल्थ थ्रू रिसर्च, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी” का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार (इन्नोवेशन) की भूमिका पर विस्तृत चर्चा करना था, जिसमें देश भर के 100 से अधिक शोधार्थियों, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
डिजिटल मेंटल हेल्थ और AI पर हुआ मंथन
दो दिवसीय सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने कई समकालीन और महत्वपूर्ण विषयों पर अपने व्याख्यान दिए। इसमें मुख्य रूप से:
- डिजिटल मेंटल हेल्थ इंटरवेंशन
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एवं डेटा आधारित मानसिक स्वास्थ्य शोध
- क्लिनिकल प्रैक्टिस में नवाचार (Innovation)
- मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े नैतिक पहलू और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की गई।
मानसिक स्वास्थ्य अब एक गंभीर वैश्विक विषय: कुलाधिपति मदनमोहन सिंह
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदनमोहन सिंह द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा:
”वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर वैश्विक विषय बन चुका है और युवाओं के बीच इस पर जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ‘माइंडटेक’ जैसी कार्यशालाएं नई सोच और अनुसंधान को बढ़ावा देती हैं।”
वहीं, कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित रिसर्च के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया जा सकता है।
देश के नामचीन वक्ताओं ने साझा किए विचार
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे की असिस्टेंट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित तथा IIIT रांची के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयदीप पति उपस्थित रहे।
- लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेरणा दीक्षित ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- डॉ. जयदीप पति ने अपने तकनीकी व्याख्यान में बताया कि किस तरह डेटा आधारित शोध और AI तकनीक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान और उनके सटीक समाधान में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
विश्वविद्यालय परिवार रहा मौजूद
इस सफल आयोजन के अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोईज़ अशरफ, आईक्यूएसी (IQAC) निदेशक डॉ. श्रद्धा वर्मा, डीन रिसर्च डॉ. ईशिता घोष, डीन एकेडमिक अभिनव कुमार, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार सहित कई संकाय सदस्य, अधिकारी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क, जमशेदपुर।
