जमशेदपुर: मानगो नगर निगम चुनाव में मेयर पद की कुर्सी को लेकर एनडीए (NDA) के अंदर और बाहर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। भाजपा नेता अभय सिंह ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार संध्या सिंह के पक्ष में मोर्चा संभालते हुए एक ऐसा बयान दिया है, जिसने विरोधियों और निर्दलीय दावेदारों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
अभय सिंह की ‘स्ट्राइक’: सब कुछ नियंत्रण में है
मीडिया से बात करते हुए अभय सिंह ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और संध्या सिंह के नाम पर कोई संशय नहीं है। उन्होंने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा:
“चुनाव में कई बार लोग जोश में नामांकन तो कर देते हैं, लेकिन समय आने पर बैठ भी जाते हैं। मानगो में भी ऐसा ही होने वाला है।”
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को सीधे तौर पर कुमकुम श्रीवास्तव के लिए एक संदेश माना जा रहा है, जिन्होंने मेयर पद के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।
राजकुमार श्रीवास्तव पर टिकी सबकी नजरें
अभय सिंह के इस दावे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल भाजपा के ही पुराने सिपाही राजकुमार श्रीवास्तव को लेकर उठ रहा है।
- चर्चा का केंद्र: क्या राजकुमार श्रीवास्तव पार्टी नेतृत्व के दबाव में अपनी पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव का नाम वापस कराएंगे?
- बगावत या समझौता: यदि कुमकुम श्रीवास्तव मैदान में डटी रहती हैं, तो एनडीए के वोटों में बिखराव तय है, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है।
अंदरूनी खींचतान और चुनावी समीकरण
हालांकि अभय सिंह ने किसी तरह की अंदरूनी कलह से इनकार किया है, लेकिन मानगो की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कुमकुम श्रीवास्तव का अपना एक मजबूत जनाधार है और उनके समर्थकों का मानना है कि वे ‘सिंबल’ से ज्यादा ‘सेवा’ के दम पर चुनाव लड़ रही हैं।
अब आगे क्या?
अब सभी की निगाहें नामांकन वापसी की अंतिम तिथि पर टिकी हैं।
- क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राजकुमार श्रीवास्तव को मनाने में सफल होगा?
- क्या एनडीए के अन्य घटक दल इस खींचतान का हिस्सा बनेंगे?
- या फिर मानगो में ‘अपनों’ के बीच ही मुकाबला देखने को मिलेगा?
मुख्य बिंदु:
- एनडीए उम्मीदवार: संध्या सिंह (अभय सिंह का पूर्ण समर्थन)।
- चुनौती: कुमकुम श्रीवास्तव की निर्दलीय या बागी दावेदारी।
- रणनीति: ‘नामांकन के बाद बैठाने’ की राजनीति शुरू।
