जमशेदपुर/परसुडीह: बादामपहाड़ से टाटानगर आ रही पैसेंजर ट्रेन मंगलवार को एक अनहोनी का शिकार होते-होते बची। परसुडीह थाना क्षेत्र के मखदुमपुर फाटक के समीप ट्रेन के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) तार में लाल रंग का एक बड़ा कपड़ा फंस गया। लोको पायलट की सूझबूझ और सतर्कता के कारण एक संभावित गंभीर दुर्घटना को समय रहते टाल दिया गया।
लोको पायलट की सतर्कता ने बचाया ‘पैंटो’
झारखंड नगर के समीप जब ट्रेन गुजर रही थी, तभी लोको पायलट की नजर बिजली के तारों (OHE) में फंसे लाल कपड़े पर पड़ी।
- तकनीकी खतरा: लोको पायलट के अनुसार, यदि ट्रेन को उसी गति में आगे ले जाया जाता, तो इंजन के ऊपर लगा पैंटोग्राफ (Panto) उस कपड़े में फंसकर टूट सकता था।
- गंभीर परिणाम: पैंटो गिरने से न केवल पूरी ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो जाती, बल्कि ट्रेन के ऊपर हाई-वोल्टेज शार्ट सर्किट होने का भी खतरा था। खतरे को भांपते हुए लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी और रेलवे कंट्रोल को सूचित किया।
यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें: पैदल ही निकले लोग
ट्रेन के घंटों तक मखदुमपुर फाटक के पास खड़े रहने से यात्रियों का सब्र जवाब दे गया।
- असुविधा: उमस और गर्मी के बीच ट्रेन में फंसे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हुई।
- पैदल मार्च: टाटानगर स्टेशन नजदीक होने के कारण कई यात्री ट्रेन से उतरकर पटरियों के सहारे पैदल ही अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े। यात्रियों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी भी जाहिर की।
शरारत या लापरवाही?
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे सूत्रों का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व की करतूत हो सकती है। आशंका है कि किसी ने कपड़े को पत्थर में बांधकर बिजली के तारों की ओर फेंका होगा।
”रेलवे की बिजली लाइनों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ करना न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है।” — रेलवे सुरक्षा बल (RPF) सूत्र
रेलवे की कार्रवाई
सूचना मिलते ही रेलवे की तकनीकी टीम (TRD विभाग) टावर वैगन के साथ मौके पर पहुंची। सीढ़ी की मदद से ओएचई तार में फंसे कपड़े को हटाया गया और पूरी लाइन की जांच की गई। तकनीकी क्लियरेंस मिलने के बाद ही ट्रेन को टाटानगर की ओर रवाना किया गया।
रेलवे की अपील: रेल प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक के आसपास ऐसी गतिविधियों से बचें जिससे परिचालन प्रभावित हो।
