गुड़ाबांधा में ‘पीला सोना’ लूट रहे बालू माफिया: रेडूवा घाट से सरेआम 150 ट्रैक्टरों की ढुलाई; प्रशासन पर ‘मंथली’ सेटिंग के गंभीर आरोप
गुड़ाबांधा/जमशेदपुर | विशेष टीम
झारखंड सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद गुड़ाबांधा प्रखंड में बालू माफियाओं का दुस्साहस सातवें आसमान पर है। फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत स्थित स्वर्णरेखा नदी के रेडूवा घाट से पिछले एक साल से अवैध बालू का खुला खेल चल रहा है। प्रतिदिन करीब 150 ट्रैक्टर बालू की चोरी कर सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
बिना नंबर, बिना चालान: ‘कानस पुलिया’ बना अवैध कॉरिडोर
अवैध तस्करी का आलम यह है कि घाट से निकलने वाले अधिकांश ट्रैक्टरों पर न तो रजिस्ट्रेशन नंबर है और न ही ड्राइवरों के पास कोई वैध चालान। ये ट्रैक्टर बेखौफ होकर कानस पुलिया के रास्ते धालभूमगढ़ और आसपास के इलाकों में बालू खपा रहे हैं।
आरोप: ₹2000 मासिक और ₹50 प्रतिदिन की ‘सेटिंग’
ग्रामीणों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सीधा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार:
- प्रति ट्रैक्टर ₹2000 मासिक (मंथली) और ₹50 प्रतिदिन का नजराना कथित तौर पर व्यवस्था को दिया जाता है।
- इसी ‘सेटिंग’ के कारण थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी (सीओ) को सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक कार्रवाई शून्य है।
सड़कों का बुरा हाल, राजस्व का नुकसान
ओवरलोड ट्रैक्टरों की वजह से ग्रामीण सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है। माफियाओं की जेबें भर रही हैं, जबकि सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोगों में इस दोहरी मार को लेकर भारी आक्रोश है।
“जन आंदोलन होगा”: सिर्मा देवगम
समाजसेवी सह आरटीआई एक्टिविस्ट सिर्मा देवगम ने इस पूरे मामले को उपायुक्त (डीसी) के संज्ञान में लाते हुए दोषियों पर IPC की धारा 379 (चोरी) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
”यदि प्रशासन ने जल्द ही औचक निरीक्षण कर इन माफियाओं पर नकेल नहीं कसी, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे।” — ग्रामीणों की चेतावनी
तीसरी धारा कड़ा सवाल: चुप्पी आखिर क्यों?
जब ग्रामीणों को पता है कि बालू कहाँ जा रहा है, तो प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं? क्या ‘स्वर्णरेखा’ का सीना सिर्फ माफियाओं की तिजोरी भरने के लिए चीरा जा रहा है?
