राँची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस बार असम विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ उतरने का मन बना लिया है। पार्टी विशेष रूप से उन 20 से अधिक सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है, जहाँ ‘टी-ट्राइब्स’ (चाय बागान श्रमिक) मतदाताओं का दबदबा है। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने स्पष्ट किया है कि यदि कांग्रेस गठबंधन के तहत सम्मानजनक सीटें नहीं देती है, तो पार्टी वहां के स्थानीय छोटे दलों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी।
हेमंत सोरेन और गौरव गोगोई के बीच हुई अहम चर्चा
पिछले दिनों असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने राँची का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ करीब एक घंटे तक गहन चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आलाकमान ने असम में झामुमो की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए ही गोगोई को राँची भेजा था। बैठक में मुख्य रूप से उन 35-40 सीटों पर चर्चा हुई जहाँ झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से जाकर बसे आदिवासी समुदाय के लोग निर्णायक भूमिका में हैं।
ग्राउंड लेवल पर झामुमो की सक्रियता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले छह महीनों में दो बार असम का दौरा कर चुके हैं। अपनी रैलियों में उन्होंने टी-ट्राइब्स की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। इसके अलावा, झामुमो की नजर वहां के मुस्लिम मतदाताओं पर भी है, जिसका संकेत मुख्यमंत्री के इफ्तार पार्टी में शामिल होने से मिला है।
नेताओं ने डाला डेरा
पार्टी की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए राज्य के कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और राजमहल सांसद विजय हांसदा असम में लगातार कैंप कर रहे हैं। झामुमो की एक विशेष टीम वहां हफ्तों रहकर जमीनी स्तर पर होमवर्क कर रही है ताकि चुनाव में मजबूती से उतरा जा सके।
तीसरी धारा न्यूज डेस्क
