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झारखंड बनेगा कृषि का नया हब, 2026 में किसानों को ये पांच बड़ी उम्मीदें

लगातार उपलब्धियों के बाद झारखंड में कृषि क्षेत्र अब एक नए मोड़ पर खड़ा है। वर्ष 2025 तक के युवा सफर में खेती, पशुपालन, मत्स्य और सहकारिता के क्षेत्र में जो मजबूत आधार तैयार हुआ है, उसी पर आगे बढ़कर वर्ष 2026 को कृषि नवाचार और किसान समृद्धि का वर्ष बनाने की तैयारी है।

सरकार, कृषि विभाग और किसान- तीनों की साझा भागीदारी से 2026 में झारखंड को कृषि में नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बढ़ा हुआ 4000 करोड़ का कृषि बजट, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सिंचाई विस्तार, पशुधन विकास योजनाएं और सहकारिता के सशक्त ढांचे ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाला वर्ष केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आय, बाजार तक पहुंच और जोखिम प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर केंद्रित होगा। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि झारखंड में कृषि क्षेत्र अब केवल वृद्धि के दौर में नहीं, बल्कि स्थायित्व और गुणवत्ता के चरण में प्रवेश कर चुका है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो आने वाला वर्ष झारखंड को आत्मनिर्भर और लाभकारी कृषि राज्य बनाने के साथ ही स्थायित्व और समृद्धि की दिशा तय करने वाला वर्ष हो सकता है।

पांच बड़ी उम्मीदें

1. कृषि आय में 20-25% तक बढ़ोतरी की उम्मीद: धान उत्पादकता 11 से बढ़कर 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो चुकी है। इसी आधार पर फसल विविधीकरण, बागवानी और पशुपालन को जोड़कर 2026 में किसानों की औसत आय में 20-25% तक बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

2. सिंचाई क्षेत्र में बड़ा विस्तार: ड्रिप इरिगेशन का दायरा क्रमवार बढ़कर 35,000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। 2026 में इसे वर्षा-आश्रित क्षेत्रों तक और फैलाकर सिंचित रकबे में ठोस वृद्धि की संभावना है।

3. दाल-तिलहन में राष्ट्रीय पहचान: दालों का रकबा 1.14 लाख से बढ़कर आठ लाख हेक्टेयर हो चुका है। उत्पादकता बढ़कर 1,069 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर आ चुका है। 2026 में झारखंड के देश के शीर्ष पांच दाल उत्पादक राज्यों में शामिल होने की उम्मीद है।

4. पशुपालन से ग्रामीण आय में उछाल: दूध उत्पादन 10 लाख टन से बढ़कर 34 लाख टन हो चुका है। फिलहाल दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 237 ग्राम प्रतिदिन है। इसे 2026 में राष्ट्रीय औसत के करीब लाने का लक्ष्य रखा गया है।

5. डिजिटल और पारदर्शी कृषि व्यवस्था: 36 लाख से अधिक किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्लॉकचेन आधारित योजनाओं से लाभान्वित हो चुके हैं। 2026 में सभी प्रमुख योजनाओं को डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ने की उम्मीद है।

नीतियों को जमीन पर उतारने की रहेगी चुनौती

कृषि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती योजनाओं को जमीन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का विस्तार तो हुआ है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर डिजिटल साक्षरता और नेटवर्क की कमी अभी भी बड़ी बाधा है। आज भी बहुत किसान सरकारी योजनाओं से दूर हैं। अनियमित मानसून, अल्प या अतिवृष्टि और अचानक मौसम बदलाव के कारण फसल जोखिम बढ़ रहा है, जिससे फसल बीमा और राहत तंत्र को और मजबूत करना आवश्यक होगा। इसके अलावा, सिंचाई विस्तार और जल-संरक्षण योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, छोटे और सीमांत किसानों को खाद, बीज की राहत, बाजार से जोड़ना तथा कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण सुविधाओं का समान वितरण भी बड़ी चुनौती रहेगी।

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