रांची: झारखंड राज्य बार काउंसिल के आगामी चुनावों के लिए निर्धारित की गई ‘अतार्किक’ जमानत राशि ने कानूनी गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। काउंसिल द्वारा नामांकन के लिए जमानत राशि को सीधे 10,000 रुपये से बढ़ाकर 1,25,000 रुपये करने के फैसले का राज्य के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
विरोध के मुख्य बिंदु: क्यों नाराज हैं अधिवक्ता?
अधिवक्ताओं के एक बड़े समूह ने इस निर्णय को ‘वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर’ वकीलों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। विरोध जता रहे वकीलों के तर्क निम्नलिखित हैं:
- लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन: वकीलों का कहना है कि जमानत राशि में 1250% की वृद्धि पूरी तरह से अव्यावहारिक और अलोकतांत्रिक है। यह फैसला योग्य लेकिन आर्थिक रूप से अक्षम अधिवक्ताओं को नेतृत्व करने से रोकता है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी: अधिवक्ताओं ने हवाला दिया कि जहां माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने नए अधिवक्ताओं के एनरोलमेंट शुल्क को न्यूनतम (₹1000 से कम) रखने का निर्देश दिया है, वहीं बार काउंसिल इसके विपरीत दिशा में काम कर रही है।
- आम सभा की सहमति का अभाव: आरोप है कि इतनी बड़ी राशि तय करने से पहले बार काउंसिल ने कोई आम सभा (General Body Meeting) आयोजित नहीं की और न ही सदस्यों की राय ली। इसे ‘मनमाना और गैर-कानूनी’ निर्णय बताया जा रहा है।
बीमारू राज्य की दुहाई और विरोधाभास
विरोध प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने याद दिलाया कि झारखंड एक गरीब राज्य है। उन्होंने सरकार के उस फैसले का भी जिक्र किया जब ₹5 से ₹10 की सरकारी फीस वृद्धि पर पूरे राज्य के वकील आंदोलित हो गए थे। ऐसे में बार काउंसिल द्वारा खुद सवा लाख रुपये की फीस वसूलना एक बड़ा विरोधाभास पैदा करता है।
”यह निर्णय झारखंड के वकीलों की आर्थिक स्थिति के साथ एक भद्दा मजाक है। बार काउंसिल को चंदा उगाही का केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षक होना चाहिए। हम इस मनमाने फैसले के खिलाफ उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग करते हैं।”
— वरिष्ठ अधिवक्ता एवं प्रतिनिधि
आगे की रणनीति
वकील समुदाय ने अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों और न्यायिक संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि जमानत राशि को घटाकर न्यूनतम और तर्कसंगत नहीं किया गया, तो वे इस चुनाव प्रक्रिया के बहिष्कार और कानूनी चुनौती देने पर विचार करेंगे।
