रांची: झारखंड में सात वर्षों से प्रतीक्षित नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। मुख्यमंत्री सह झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने सोमवार को रांची स्थित अपने आवास पर पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि नगर निकाय चुनाव कार्यकर्ताओं के लिए जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का एक बेहतरीन अवसर है।
बैठक की मुख्य बातें
कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित इस बैठक में रांची जिला के सभी स्तर के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
- संगठनात्मक समीक्षा: मुख्यमंत्री ने संगठन के कार्यों की समीक्षा की और चुनावी रणनीति पर चर्चा की।
- जनसंपर्क पर जोर: हेमंत सोरेन ने कहा कि कार्यकर्ताओं को वार्ड स्तर पर जनता की समस्याओं को सुनना चाहिए और सरकार की योजनाओं को उन तक पहुँचाना चाहिए।
- प्रमुख उपस्थिति: बैठक में JMM के दिग्गज नेता विनोद कुमार पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य, अभिषेक प्रसाद ‘पिंटू’ और पवन जेडिया सहित कई जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
बड़ा सवाल: क्या दलीय आधार पर होंगे चुनाव?
निकाय चुनाव को लेकर सबसे बड़ा संशय अभी भी बरकरार है कि क्या यह चुनाव दलीय (Party-based) आधार पर होंगे या गैर-दलीय।
- भाजपा की मांग: भाजपा ने हाल ही में रांची सहित राज्यभर के निकायों के बाहर धरना प्रदर्शन किया है। उनकी मांग है कि चुनाव दलीय आधार पर हों और EVM का प्रयोग किया जाए। भाजपा का तर्क है कि बिना दलीय आधार के चुनाव होने से प्रत्याशियों की बाढ़ आ जाएगी और वोट बिखर जाएंगे।
- जदयू की सक्रियता: जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी अपनी कमर कस ली है। पार्टी ने सभी जिला अध्यक्षों से इच्छुक उम्मीदवारों की सूची मांगी है, जो यह दर्शाता है कि विपक्षी दल पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहते हैं।
- सरकार का रुख: 2018 में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव दलीय आधार पर हुए थे, लेकिन हेमंत सोरेन सरकार ने बाद में नियमों में बदलाव कर इन्हें गैर-दलीय आधार पर कराने का निर्णय लिया था। हालांकि, विपक्ष के दबाव और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अब सबकी नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
चुनाव की वर्तमान स्थिति
राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, फरवरी-मार्च 2026 तक चुनावों की घोषणा हो सकती है। राज्य में कुल 48 नगर निकायों (9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत) में चुनाव होने हैं। पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) ने भी अपनी ‘ट्रिपल टेस्ट’ रिपोर्ट सौंप दी है, जिससे आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है।

