जमशेदपुर: लौहनगरी की व्यापारिक रीढ़ माने जाने वाले सैरात बाजार इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शहर की पहचान बन चुके इन 115 साल पुराने बाजारों में किराए की विसंगतियों और प्रबंधन के बदलाव ने हजारों व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। टाटा स्टील से प्रबंधन का जिम्मा जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) के पास आने के बाद से यह विवाद गहराता जा रहा है।
क्या है सैरात बाजार का गणित?
जमशेदपुर में सरकारी जमीन पर बनी दुकानों को ‘सैरात’ कहा जाता है, जिनका मालिकाना हक नगर निकाय के पास होता है। व्यापारी यहां दशकों से लाइसेंस या किराए पर व्यापार कर रहे हैं।
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 52.73 एकड़ जमीन।
- कुल दुकानें: 10 प्रमुख बाजारों में 7,700 से अधिक दुकानें।
- सबसे बड़ा केंद्र: साकची बाजार (अकेले 47% दुकानें यहीं स्थित हैं)।
प्रमुख बाजारों में दुकानों की स्थिति:
| बाजार का नाम | दुकानों की संख्या |
|---|---|
| साकची बाजार | 3,644 |
| बिष्टुपुर बाजार | 1,640 |
| बारीडीह | 606 |
| कदमा | 567 |
| गोलमुरी | 347 |
| अन्य (बर्मामाइंस, सिदगोड़ा, आदि) | लगभग 900+ |
विवाद की जड़: प्रबंधन और किराया वृद्धि
दशकों तक इन बाजारों का प्रबंधन टाटा स्टील के लैंड डिपार्टमेंट के पास था। लेकिन अप्रैल 2022 में कंपनी द्वारा एनओसी (NOC) जारी किए जाने के बाद यह पूरी तरह जेएनएसी के नियंत्रण में आ गया।
मुख्य कारण:
- राजस्व का लक्ष्य: सरकार का तर्क है कि इन व्यावसायिक संपत्तियों से होने वाली आय नगर निकाय को मिलनी चाहिए, ताकि शहर के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं का विकास हो सके।
- नया किराया ढांचा: जेएनएसी द्वारा प्रस्तावित नए किराए के ढांचे का व्यापारी विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह वृद्धि अव्यावहारिक है और छोटे दुकानदारों पर भारी बोझ डालेगी।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल प्रशासन और राज्य सरकार के बीच इस मामले को लेकर मंथन जारी है। अधिकारियों का कहना है कि वे एक “संतुलित समाधान” तलाश रहे हैं, जिससे नगर निकाय का राजस्व भी बढ़े और पुराने व्यापारियों का हित भी सुरक्षित रहे। हालांकि, जब तक कोई ठोस नीति नहीं बनती, तब तक इन ऐतिहासिक बाजारों के भविष्य पर संशय के बादल मंडराते रहेंगे।
तीसरी धारा न्यूज के लिए जमशेदपुर से रिपोर्ट।
