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जमशेदपुर: ‘स्टील सिटी’ या ‘क्राइम सिटी’? बेलगाम अपराधियों के आगे नतमस्तक पुलिस, चापड़बाजी से दहला शहर

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में इन दिनों कानून का इकबाल खत्म होता नजर आ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जिस तरह से चाकूबाजी और चापड़बाजी की घटनाएं बढ़ी हैं, उसने पुलिसिया चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरेराह खून-खराबा अब आम बात हो गई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ रत्ती भर भी नहीं बचा है।jamshedpur police

गली-नुक्कड़ पर ‘चापड़’ का खौफ

​टेल्को हो या सोनारी, मानगो हो या जुगसलाई—शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा है जहां हाल के दिनों में हिंसक वारदात न हुई हो। छोटी-छोटी बातों और मामूली विवादों में धारदार हथियारों का इस्तेमाल ‘ट्रेंड’ बन गया है।

प्रशासन की ‘प्राथमिकता’ पर सवाल: चेकिंग में व्यस्त, अपराध में पस्त?

​स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस प्रशासन का पूरा जोर केवल हेलमेट और कागजात चेकिंग के नाम पर ‘वसूली’ तक सीमित रह गया है।

कानून का डर खत्म, पुलिस की नाकामी उजागर

​हाल ही में टेल्को थीम पार्क के पास हुई चापड़बाजी की घटना हो या अन्य क्षेत्रों में हुई हिंसक वारदातें, अपराधी घटना को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं। पुलिस की गश्ती (Patrolling) केवल मुख्य सड़कों तक सिमट गई है, जबकि अपराधी बस्तियों और भीतरी इलाकों में अपनी समानांतर सत्ता चला रहे हैं।

तीसरी धारा न्यूज का तीखा प्रहार

​प्रशासन की यह शिथिलता शहर की शांति के लिए बड़ा खतरा है। यदि समय रहते पुलिस ने अपना रवैया नहीं बदला और अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए, तो जमशेदपुर की छवि एक ‘क्रिमिनल हब’ के रूप में बन जाएगी।

जनता पूछती है: क्या एसएसपी और जिला प्रशासन केवल बैठकों तक सीमित रहेंगे या धरातल पर अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ फिर से पैदा किया जाएगा?

 

विशेष रिपोर्ट: टीम तीसरी धारा न्यूज

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