जमशेदपुर: शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों की आरक्षित सीटों (BPL कोटा) पर नामांकन के लिए जमा किए गए दस्तावेजों की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शुरुआती स्क्रूटनी के दौरान 35 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
JNAC और मानगो अंचल को भेजा गया पत्र
शिक्षा विभाग ने इन संदिग्ध दस्तावेजों की सत्यता की जांच के लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। विभाग ने उन 35 संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की सूची जेएनएसी को भेजी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे आधिकारिक रूप से जारी किए गए हैं या फर्जी तरीके से तैयार किए गए हैं।
आय प्रमाण पत्रों पर भी गहराया शक
जांच का दायरा केवल जन्म प्रमाण पत्र तक सीमित नहीं है। शिक्षा विभाग को मानगो नगर निगम क्षेत्र से संबंधित 5 आय प्रमाण पत्रों में भी विसंगतियां मिली हैं। इन प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए मानगो अंचल कार्यालय भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि आरक्षित सीटों का लाभ लेने के लिए कुछ आवेदकों ने गलत आय का विवरण प्रस्तुत किया है।
फर्जी पाए जाने पर सीधे निरस्त होंगे आवेदन
शिक्षा विभाग ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि:
- यदि जेएनएसी या अंचल कार्यालय से प्रमाण पत्रों के फर्जी होने की पुष्टि होती है, तो संबंधित बच्चों के आवेदनों को तत्काल निरस्त (Cancel) कर दिया जाएगा।
- विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षित सीटों का लाभ केवल वास्तविक और योग्य बच्चों को ही मिले।
पिछले साल के मुकाबले सुधरी स्थिति
राहत की बात यह है कि विभाग के अनुसार इस वर्ष फर्जीवाड़े के मामलों में गिरावट आई है।
- पिछला रिकॉर्ड: पिछले वर्षों में लगभग 100 प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे।
- वर्तमान सत्र: इस वर्ष 3,000 से अधिक आवेदनों में से अब तक 35 संदिग्ध पाए गए हैं।
अगला कदम: विभाग ने संबंधित निकायों को अविलंब रिपोर्ट सौंपने को कहा है ताकि नामांकन प्रक्रिया में देरी न हो और योग्य बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।
