जमशेदपुर: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘यूजीसी विधेयक 2026’ के विरोध में आज लौहनगरी की सड़कों पर सवर्ण समाज का जनसैलाब उमड़ पड़ा। झारखंड क्षत्रिय संघ और सवर्ण महासभा के नेतृत्व में साकची में एक विशाल ‘आक्रोश मार्च’ निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने इस विधेयक को ‘काला कानून’ करार देते हुए पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
“भक्ति नहीं, प्रतिशोध का हथियार है यह बिल”
आक्रोश मार्च का नेतृत्व कर रहे झारखंड क्षत्रिय संघ के अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह ने कहा कि यह विधेयक शैक्षणिक संस्थानों में समरसता लाने के बजाय सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसे वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा।
विधेयक की मुख्य कमियां: क्यों है विरोध?
ज्ञापन में सवर्ण समाज ने विधेयक की कई धाराओं पर गंभीर आपत्ति जताई है:
- पूर्वाग्रहित ढांचा: विधेयक में माना गया है कि केवल आरक्षित वर्ग के साथ ही भेदभाव होता है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्र पहले ही ‘दोषी’ की श्रेणी में आ जाते हैं।
- अंतर्निहित (Implicit) भेदभाव: धारा 3(1)ङ में ‘अंतर्निहित’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसे परिभाषित करना कठिन है। इसका दुरुपयोग सामान्य वर्ग के छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए हो सकता है।
- गोपनीय शिकायत (धारा 6): समता हेल्पलाइन पर शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखने का प्रावधान है, जिससे छात्र राजनीति और आपसी रंजिश के तहत झूठी शिकायतें बढ़ने का डर है।
- समता समिति में प्रतिनिधित्व का अभाव: धारा 5(7) के तहत बनने वाली समिति में सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए कोई अनिवार्य स्थान नहीं है।
- निर्दोष होने तक दोषी: पॉक्सो एक्ट की तर्ज पर इसमें भी आरोपी को तब तक दोषी माना जाता है जब तक वह निर्दोष साबित न हो जाए।
- झूठी शिकायत पर दंड नहीं: पहले झूठी शिकायत पर जुर्माने का प्रावधान था, जिसे अब हटा दिया गया है।
यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई हालिया रोक का स्वागत किया। समाजसेवी शिवशंकर सिंह और प्रवक्ता मंजू सिंह ने कहा कि संस्थानों की स्वायत्तता पर प्रहार और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई का दबाव ‘जल्दबाजी में किया गया अन्याय’ साबित होगा।
इन संगठनों और हस्तियों की रही मौजूदगी
इस आक्रोश मार्च में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। मुख्य रूप से ब्राह्मण समाज से कमल किशोर, डी के मिश्रा, ब्रह्मर्षि समाज के अध्यक्ष राम नारायण शर्मा, कायस्थ महासभा के अजय श्रीवास्तव, जिला परिषद सदस्य डॉ. कविता परमार, नीरज सिंह, और विभिन्न युवा व महिला कमेटियों के सदस्य उपस्थित थे।
निष्कर्ष और मांग
सवर्ण समाज ने केंद्र सरकार से मांग की है कि:
- छात्रों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई वाली धाराओं को तुरंत हटाया जाए।
- उच्च शिक्षा में स्वायत्तता और लोकतांत्रिक स्वरूप बहाल रखा जाए।
- विधेयक को वर्तमान स्वरूप में तुरंत वापस लिया जाए।
