नई दिल्ली/दुबई: पश्चिम एशिया में बीते 10 दिनों से जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जहां एक तरफ इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी पलटवार करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सहयोगियों पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है।
इस बीच, भारत में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। मिर्जा का मानना है कि इस महायुद्ध को रोकने की शक्ति भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास है।
‘बस एक फोन कॉल और युद्ध खत्म’
एनडीटीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में हुसैन हसन मिर्जा ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का खाड़ी देशों, राजनीतिक नेतृत्व और आम जनता के बीच व्यापक सम्मान है। उनकी विश्वसनीयता ऐसी है कि ईरान और इजरायल दोनों उनकी बात टाल नहीं पाएंगे। मिस्टर मोदी का अपने समकक्षों को किया गया सिर्फ एक फोन कॉल इस पूरे मसले को सुलझा सकता है और युद्ध को एक झटके में खत्म कर सकता है।”
UAE नहीं बनेगा किसी का ‘लॉन्चिंग पैड’
मिर्जा ने साफ कर दिया कि संयुक्त अरब अमीरात इस जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहता। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
- UAE अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश (चाहे वह ईरान हो या इजरायल-अमेरिका) के लिए ‘लॉन्चिंग पैड’ के तौर पर नहीं होने देगा।
- उन्होंने सवाल उठाया कि यह लड़ाई हमारी जमीन पर क्यों लड़ी जा रही है? यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
- UAE की भू-राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि उसके दोनों पक्षों के साथ संबंध हैं, इसलिए वह एक ‘बातचीत का पुल’ (Bridge of Communication) बनने को तैयार है।
28 फरवरी से दहक रहा है पश्चिम एशिया
बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग ने क्षेत्र की स्थिरता को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इजरायल और अमेरिका के साझा हमलों के जवाब में ईरान के आक्रामक रुख ने खाड़ी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में वैश्विक समुदाय अब भारत की ओर देख रहा है कि क्या ‘विश्वबंधु’ की भूमिका निभाने वाले पीएम मोदी इस संकट में मध्यस्थता करेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
