मुंबई/नई दिल्ली: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में मचे हड़कंप का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला। मात्र दो कारोबारी सत्रों में भारतीय निवेशकों की करीब 9.7 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई है।
शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,710 अंक टूटा
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में ‘रक्तपात’ जैसी स्थिति रही। चौतरफा बिकवाली के कारण प्रमुख सूचकांक धराशायी हो गए:
- सेंसेक्स: 1,710 अंकों की भारी गिरावट के साथ 78,529 पर बंद हुआ। यह पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।
- निफ्टी 50: 477 अंक लुढ़ककर 24,389 के स्तर पर आ गया। सात महीनों में पहली बार निफ्टी 24,400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला है।
- मार्केट कैप: BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन सोमवार के 456.17 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 446.47 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
ऐतिहासिक गिरावट: पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 92 के पार
युद्ध के डर से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसे निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे सोना और डॉलर) की ओर रुख किया है। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय रुपया इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपया 55 पैसे गिरकर 92.03 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब भारतीय मुद्रा ने 92 का स्तर पार किया है।
क्यों डरा हुआ है बाजार?
बाजार में इस गिरावट के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- कच्चे तेल में उबाल: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $82.53 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का सीधा खतरा है।
- लंबा खिंच सकता है युद्ध: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी कि यह संघर्ष “4 से 5 सप्ताह” तक चल सकता है, ने अनिश्चितता बढ़ा दी है।
- विदेशी निवेशकों की निकासी: अकेले पिछले सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींच लिए।
इन शेयरों पर गिरी गाज
बिकवाली के इस दौर में सबसे ज्यादा मार दिग्गज कंपनियों पर पड़ी। L&T, इंडिगो, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3% से 6% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की सलाह: घबराएं नहीं, धीरे-धीरे करें निवेश
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, असली चिंता महंगाई और विकास दर को लेकर है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को पैनिक (घबराहट) में आकर बिकवाली न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के निवेशक इस गिरावट का फायदा उठाकर अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क
