नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी क राहत भरी खबर आई है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत का बड़ा असर देखने को मिला है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर भारतीय झंडाधारी (India-flagged) टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।
दो भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी
कूटनीतिक सहमति बनते ही दो भारतीय टैंकर ‘Pushpak’ और ‘Parimal’ को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरते हुए देखा गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है।
रणनीतिक हथियार बना ‘होर्मुज’
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जलमार्ग को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ईरान के कड़े रुख के अनुसार, वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों वाले तेल को यहां से गुजरने नहीं देगा। ईरान के हालिया बयान, “हम एक भी लीटर तेल अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गुजरने नहीं देंगे,” ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है।
भारत के लिए क्यों है यह खास?
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है। सुरक्षित मार्ग मिलने से तेल आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
- मजबूत कूटनीति: जहां दुनिया के शक्तिशाली देश इस क्षेत्र में संघर्ष का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत ने बातचीत के जरिए अपने हितों की रक्षा की है।
- वैश्विक प्रभाव: यह समझौता वैश्विक स्तर पर भारत और ईरान के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और भारत की ‘तटस्थ एवं प्रभावी’ विदेश नीति को दर्शाता है।
निष्कर्ष: युद्ध और नाकेबंदी के इस दौर में भारत की यह सफलता साबित करती है कि कठिन से कठिन वैश्विक संकटों का समाधान भी प्रभावी कूटनीति से निकाला जा सकता है।
