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जमीन घोटाला मामला: CM हेमंत सोरेन की ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ पर 30 जनवरी को होगी अहम सुनवाई

राँची, झारखंड। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। रांची की विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत अब 30 जनवरी को मुख्यमंत्री द्वारा दायर ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ (आरोप मुक्त करने की याचिका) पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

​मुख्य घटनाक्रम:

​मामले की पृष्ठभूमि: बड़गाईं जमीन घोटाला

​यह पूरा विवाद रांची के बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस जमीन को अवैध तरीके से हड़पने के लिए सरकारी दस्तावेजों में बदलाव किए गए और इसमें भारी वित्तीय लेन-देन हुआ।

मामले की टाइमलाइन:

​’डिस्चार्ज पिटीशन’ क्या है और इसके मायने?

​कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब किसी आरोपी को लगता है कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, तो वह ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ दाखिल कर सकता है।

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

​झारखंड की राजनीति में इस सुनवाई को काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के समर्थक जहां इसे ‘न्याय की जीत’ की उम्मीद बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। 30 जनवरी का फैसला यह तय करेगा कि मुख्यमंत्री को इस कानूनी पचड़े से राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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