नई दिल्ली: भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में आज एक नया इतिहास रचा गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने एक युगांतकारी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि महिला सैन्य अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की पूर्ण हकदार हैं। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं के मूल्यांकन में होने वाले ‘संस्थागत भेदभाव’ को खत्म करने का आदेश दिया है।
मूल्यांकन ढांचे में छिपा था भेदभाव: CJI
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सेना की मूल्यांकन प्रक्रिया (ACR) की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने माना कि महिला अधिकारियों के करियर रिकॉर्ड (ACR) इस धारणा के साथ तैयार किए गए थे कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन मिलेगा ही नहीं।
कोर्ट की तीन बड़ी टिप्पणियां:
- मनमानी सीमा: हर साल केवल 250 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की सीमा को कोर्ट ने ‘मनमाना’ करार दिया है।
- असमान मापदंड: तय किए गए मापदंडों ने महिला अधिकारियों को पुरुष अधिकारियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में रखा।
- अप्रत्यक्ष भेदभाव: स्थायी कमीशन न मिलना मूल्यांकन के उस ढांचे का परिणाम था जिसमें भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी थीं।
पेंशन में राहत, लेकिन रैंक प्रमोशन पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है:
- बढ़ी हुई पेंशन: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि महिला अधिकारियों को सेवा से रिहाई के समय उनके ‘नेशनल रैंक’ के आधार पर हाइक्ड पेंशन (Hiked Pension) का लाभ मिलेगा। यह उनके लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है।
- रैंक प्रमोशन: कोर्ट ने साफ किया कि ‘नेशनल टाइम स्केल प्रमोशन’ या ‘रैंक प्रमोशन’ देना संभव नहीं है, क्योंकि इससे सेना के कामकाज और संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अनुच्छेद 142 का ‘ब्रह्मास्त्र’
सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में न्याय के हित में आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट ने साफ कहा कि पुरुष शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि स्थायी कमीशन केवल उन्हीं का अधिकार है।
देरी से हुआ नुकसान
अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों को लागू करने में हुई देरी के कारण कई योग्य महिला अधिकारियों को करियर में नुकसान उठाना पड़ा है। अब इस फैसले के बाद सेना को अपने मूल्यांकन ढांचे में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।
तीसरी धारा न्यूज विशेष: क्या होता है स्थायी कमीशन (PC)?
आसान शब्दों में कहें तो स्थायी कमीशन का मतलब है कि एक सैन्य अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) की आयु तक सेना में सेवा दे सकता है। इससे पहले, महिला अधिकारियों को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत 10 से 14 साल तक सेवा करने की अनुमति थी, जिससे वे पेंशन और उच्च पदों से वंचित रह जाती थीं।
